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विनय!
आज एक बार मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि और छायावाद युग के एक स्तंभ स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| पंत जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की यह कविता – मा! मेरे जीवन की हारतेरा मंजुल हृदय-हार हो,अश्रु-कणों…
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सिलसिला टूटा नहीं है!
जिस को भी चाहा उसे शिद्दत से चाहा है ‘फ़राज़’सिलसिला टूटा नहीं है दर्द की ज़ंजीर का अहमद फ़राज़
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इश्क़ में सर फोड़ना!
इश्क़ में सर फोड़ना भी क्या कि ये बे-मेहर लोग,जू*-ए-ख़ूँ को नाम दे देते हैं जू-ए-शीर का| *River अहमद फ़राज़
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ये आलम भी देखा है!
जिस तरह बादल का साया प्यास भड़काता रहे,मैं ने ये आलम भी देखा है तिरी तस्वीर का| अहमद फ़राज़
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कैसे पाया था तुझे!
कैसे पाया था तुझे फिर किस तरह खोया तुझे, मुझ सा मुंकिर भी तो क़ाएल हो गया तक़दीर का| अहमद फ़राज़
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ख़्वाब क्या देखा कि!
रात क्या सोए कि बाक़ी उम्र की नींद उड़ गई,ख़्वाब क्या देखा कि धड़का लग गया ताबीर का| अहमद फ़राज़
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खगोलशास्त्री- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…
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बात कर तुझ पर गुमाँ!
मुंतज़िर कब से तहय्युर है तिरी तक़रीर का, बात कर तुझ पर गुमाँ होने लगा तस्वीर का| अहमद फ़राज़