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हम भी हाथ फैलाएँ!
वहीं चलो वहीं अब हम भी हाथ फैलाएँ,‘शमीम’ सारे जहाँ को जहाँ से मिलता है| शमीम जयपुरी
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अगर तलब हो तो!
तलब न हो तो किसी दर से कुछ नहीं मिलता, अगर तलब हो तो दोनों जहाँ से मिलता है| शमीम जयपुरी
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हाल ए दिल हमारा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश जी का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जो उन्होंने फिल्म- श्रीमान सत्यवादी के लिए गाया था- हाल ए दिल हमारा, जाने ना बेवफा ये ज़मानासुनो दुनिया वालों, आएगा लौटकर दिन सुहाना आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद। ******
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ये देखना है सुकूँ!
दर-ए-हबीब भी है बुत-कदा भी काबा भी,ये देखना है सुकूँ अब कहाँ से मिलता है| शमीम जयपुरी
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मधुर-मधुर मेरे दीपक जल!
आज एक बार फिर मैं छायावाद युग की एक प्रमुख स्तंभ महादेवी वर्मा जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। महादेवी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीया महादेवी वर्मा जी का यह गीत- मधुर-मधुर मेरे दीपक जल!युग-युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपलप्रियतम का पथ आलोकित कर! सौरभ…
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दास्ताँ से मिलता है!
सुना है लूट लिया है किसी को रहबर ने, ये वाक़िआ तो मिरी दास्ताँ से मिलता है| शमीम जयपुरी
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इसी ज़मीं से इसी !
इसी ज़मीं से इसी आसमाँ से मिलता है,ये कौन देता है आख़िर कहाँ से मिलता है| शमीम जयपुरी
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ज़मीं पे रह के दिमाग़ !
ज़मीं पे रह के दिमाग़ आसमाँ से मिलता है,कभी ये सर जो तिरे आस्ताँ से मिलता है| शमीम जयपुरी