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तुझे भुला देंगे अपने दिल से!
तुझे भुला देंगे अपने दिल से ये फ़ैसला तो किया है लेकिन,न दिल को मालूम है न हम को जिएँगे कैसे तुझे भुला के| साहिर लुधियानवी
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उमीद की बस्तियाँ बसा के!
बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बतों के दिए जला के,मिरी वफ़ा ने उजाड़ दी हैं उमीद की बस्तियाँ बसा के| साहिर लुधियानवी
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बे-मकानी दे गया!
ले गया हमराह अपने वो मकाँ और बाम-ओ-दर,है नज़र सब कुछ मगर इक बे-मकानी दे गया| नज़र कानपुरी
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फिर से जवानी दे गया!
बज़्म में बे-पर्दा आया मुस्कुरा कर सामने,ना-तवाँ दिल को मिरे फिर से जवानी दे गया| नज़र कानपुरी
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लागा चुनरी में दाग!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज में आज मैं मन्ना डे जी का गाया यह अत्यंत लोक्प्रिय गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****
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वो मिरे अशआ’र को !
थी ग़ज़ल मेरी बहुत बे-रब्त बे-कैफ़-ओ-असर,वो मिरे अशआ’र को अलफ़ाज़-ओ-मा’नी दे गया| नज़र कानपुरी
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बात भी इतनी कि बस!
बात भी इतनी कि बस उस ने किया मुझ को सलाम,हाँ मगर लोगों के दिल में बद-गुमानी दे गया| नज़र कानपुरी
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जाने कहाँ गए वो दिन!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म- मेरा नाम जोकर, के लिए मुकेश जी का गाया यह प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ- जाने कहाँ गए वो दिन, कहते थे तेरी राह में नज़रों को हम बिछाएंगे! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******
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सर मिरे सीने पे !
सर मिरे सीने पे उस ने जब रखा है ज़िंदगी,इस तरह दरिया-ए-दिल को वो रवानी दे गया| नज़र कानपुरी
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शिशु देवदूत – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…