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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Apr 2025

    बात रह गई दिल की!

    याद हर हाल में रहे वो मुझे,अल-ग़रज़ बात रह गई दिल की। हसरत मोहानी

  • 9th Apr 2025

    आपने क़द्र कुछ न!

    आप ने क़द्र कुछ न की दिल की,उड़ गई मुफ़्त में हँसी दिल की। हसरत मोहानी

  • 9th Apr 2025

    उन से मिल कर भी!

    कुछ समझ में नहीं आता कि ये क्या है ‘हसरत’,उन से मिल कर भी न इज़हार-ए-तमन्ना करना। हसरत मोहानी

  • 9th Apr 2025

    शिकवा है गुनाह!

    आशिक़ो हुस्न-ए-जफ़ाकार का शिकवा है गुनाह,तुम ख़बरदार ख़बरदार न ऐसा करना। हसरत मोहानी

  • 9th Apr 2025

    ज़िक्र उन्हीं का करना!

    शाम हो या कि सहर याद उन्हीं की रखनी,दिन हो या रात हमें ज़िक्र उन्हीं का करना। हसरत मोहानी

  • 9th Apr 2025

    बाद में बरसा करना!

    उन को याँ वादे पे आ लेने दे ऐ अब्र-ए-बहार,जिस क़दर चाहना फिर बाद में बरसा करना। हसरत मोहानी

  • 9th Apr 2025

    कुछ भी दुश्वार न था!

    इक नज़र भी तिरी काफ़ी थी प-ए-राहत-ए-जाँ,कुछ भी दुश्वार न था मुझ को शकेबा करना। हसरत मोहानी

  • 9th Apr 2025

    देखना भी तो उन्हें!

    देखना भी तो उन्हें दूर से देखा करना,शेवा-ए-इश्क़ नहीं हुस्न को रुस्वा करना। हसरत मोहानी

  • 9th Apr 2025

    कौवे-1

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि श्री नरेश सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नरेश जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नरेश सक्सेना जी की यह कविता – हमारे शहर के कौवे केंचुए खाते हैंआपके शहर के क्या खाते हैं कोई थाली नहीं…

  • 8th Apr 2025

    जन्नत पुकारती है!

    जन्नत पुकारती है कि मैं हूँ तिरे लिए, दुनिया ब-ज़िद है मुझ से कि जन्नत करो मुझे| मुनव्वर राना

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