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मेरा साँस उखड़ते ही!
मेरा साँस उखड़ते ही सब बैन करेंगे रोएँगे,या’नी मेरे बा’द भी या’नी साँस लिए जाते होंगे| जौन एलिया
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ज़िंदगी की कहानी!
आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| शास्त्री जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की यह कविता – ज़िंदगी की कहानी रही अनकही ! दिन गुज़रते रहे, साँस चलती रही ! अर्थ…
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वो तो मर जाते होंगे!
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का,वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे| जौन एलिया
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मेरे बाल हैं बिखरे!
उस की याद की बाद-ए-सबा में और तो क्या होता होगा,यूँही मेरे बाल हैं बिखरे और बिखर जाते होंगे| जौन एलिया