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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th Apr 2025

    कभी झुकते हुए बादल

    कभी झुकते हुए बादल कभी गिरती बिजली,कभी उठती हुई आमादा-ए-पैकार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 29th Apr 2025

    सिमटा हुआ इक प्यार

    कभी ठहरी हुई यख़-बस्ता ग़मों की झीलें,कभी सहमा हुआ सिमटा हुआ इक प्यार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 29th Apr 2025

    कभी छलकी हुई!

    कभी छलकी हुई शर्बत के कटोरों की तरह,और कभी ज़हर में डूबी हुई तलवार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 29th Apr 2025

    ग़ुंचा-ए-दिल पे वो!

    मौसम-ए-गुल में वो उड़ते हुए भौँरों की तरह,ग़ुंचा-ए-दिल पे वो करती हुई यलग़ार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 29th Apr 2025

    कैफ़ियत दिल की!

    कैफ़ियत दिल की सुनाती हुई एक एक निगाह,बे-ज़बाँ हो के भी वो माइल-ए-गुफ़्तार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 29th Apr 2025

    मन मीन!

    आज मैं विख्यात कवि स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नवीन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी की यह कविता – मछली, मछली, कितना पानी? ज़रा बता दो आज,देखूँ, कितने गहरे में है मेरा जीर्ण जहाज़।मन…

  • 28th Apr 2025

    तिरछी नज़रों में वो!

    तिरछी नज़रों में वो उलझी हुई सूरज की किरन, अपने दुज़्दीदा इशारों में गिरफ़्तार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 28th Apr 2025

    शोख़-ओ-शादाब!

    शोख़-ओ-शादाब-ओ-हसीं सादा-ओ-पुरकार आँखें,मस्त-ओ-सरशार-ओ-जवाँ बे-ख़ुद-ओ-होशियार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 28th Apr 2025

    एक मासूम मोहब्बत!

    वो मिरी दोस्त वो हमदर्द वो ग़म-ख़्वार आँखें,एक मासूम मोहब्बत की गुनहगार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 28th Apr 2025

    पलटना चाहें वहाँ से!

    न जा कि इस से परे दश्त-ए-मर्ग हो शायद,पलटना चाहें वहाँ से तो रास्ता ही न हो| मुनीर नियाज़ी

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