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तन्हाइयाँ बचा रखना!
जिस्म में फैलने लगा है शहर,अपनी तन्हाइयाँ बचा रखना| निदा फ़ाज़ली #CitySpreading #Body #AloneBeing
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अपने घर में कहीं!
मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिए,अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना| निदा फ़ाज़ली #Mosques, #ReligeousPeople #KeepGodAtHome
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काफिला आवाज का!
आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि तथा नवगीत के एक प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय देवेन्द्र शर्मा इन्द्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे इन्द्र जी का भरपूर स्नेह और मार्गदर्शन मिला परंतु उनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय देवेन्द्र शर्मा इन्द्र…
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ज़मीं की धूल भी!
चमकते चाँद-सितारों का क्या भरोसा है,ज़मीं की धूल भी अपनी उड़ान में रखना| निदा फ़ाज़ली
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मंज़िल गुमान में!
सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना,क़दम यक़ीन में मंज़िल गुमान में रखना| निदा फ़ाज़ली