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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Nov 2024

    तन्हाइयाँ बचा रखना!

    जिस्म में फैलने लगा है शहर,अपनी तन्हाइयाँ बचा रखना| निदा फ़ाज़ली #CitySpreading #Body #AloneBeing

  • 17th Nov 2024

    अपने घर में कहीं!

    मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिए,अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना| निदा फ़ाज़ली #Mosques, #ReligeousPeople #KeepGodAtHome

  • 17th Nov 2024

    काफिला आवाज का!

    आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि तथा नवगीत के एक प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय देवेन्द्र शर्मा इन्द्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे इन्द्र जी का भरपूर स्नेह और मार्गदर्शन मिला परंतु उनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय देवेन्द्र शर्मा इन्द्र…

  • 16th Nov 2024

    उस में रोने की!

    घर की ता’मीर चाहे जैसी हो,उस में रोने की कुछ जगह रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 16th Nov 2024

    जाने वालों से!

    जाने वालों से राब्ता रखना,दोस्तो रस्म-ए-फ़ातिहा रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 16th Nov 2024

    ज़मीं की धूल भी!

    चमकते चाँद-सितारों का क्या भरोसा है,ज़मीं की धूल भी अपनी उड़ान में रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 16th Nov 2024

    बना के चाँद उसे!

    वो एक ख़्वाब जो चेहरा कभी नहीं बनता,बना के चाँद उसे आसमान में रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 16th Nov 2024

    ये एहतियात भी!

    जो देखती हैं निगाहें वही नहीं सब कुछ, ये एहतियात भी अपने बयान में रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 16th Nov 2024

    जो खो गया है !

    जो साथ है वही घर का नसीब है लेकिन,जो खो गया है उसे भी मकान में रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 16th Nov 2024

    मंज़िल गुमान में!

    सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना,क़दम यक़ीन में मंज़िल गुमान में रखना| निदा फ़ाज़ली

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