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अच्छे बच्चे!
आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि श्री नरेश सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नरेश जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नरेश सक्सेना जी की यह कविता – कुछ बच्चे बहुत अच्छे होते हैंवे गेंद और ग़ुब्बारे नहीं मांगतेमिठाई नहीं मांगते ज़िद नहीं…
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उन सियाह बालों में!
जैसे आधी शब के बा’द चाँद नींद में चौंके,वो गुलाब की जुम्बिश उन सियाह बालों में| बशीर बद्र
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फूल के प्यालों में!
यूँ किसी की आँखों में सुब्ह तक अभी थे हम,जिस तरह रहे शबनम फूल के प्यालों में| बशीर बद्र
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जैसे कोई चुटकी ले!
रात तेरी यादों ने दिल को इस तरह छेड़ा, जैसे कोई चुटकी ले नर्म नर्म गालों में| बशीर बद्र
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आद्यंत-1
आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ साहित्यकार एवं कवि और धर्मयुग पत्रिका के संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भारती जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की यह कविता – जिन्दगी की डाल परकण्टकों के जाल…