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सूरज मेरी छत पे !
मैं भी हूँ मंसूब किसी के क़त्ल से अब,सूरज मेरी छत पे चमकना भूल गया| कृष्ण कुमार तूर
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मैं दुनिया भूल गया!
आख़िर ये होना था आख़िर यही हुआ,दुनिया मुझ को और मैं दुनिया भूल गया| कृष्ण कुमार तूर
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परिंदा भूल गया!
किस के जिस्म की बारिश ने सैराब किया,क्यूँ उड़ना मौसम का परिंदा भूल गया| कृष्ण कुमार तूर
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पढ़ना भूल गया!
मैं तो था मौजूद किताब के लफ़्ज़ों में,वो ही शायद मुझ को पढ़ना भूल गया| कृष्ण कुमार तूर
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ख़ुद को क़तरा!
ये कैसी बे-आब ज़मीं का सामना था,ख़ुद को क़तरा क़तरे को दरिया भूल गया| कृष्ण कुमार तूर
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राजा आएँगे!
आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीत कवि श्री नचिकेता जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| नचिकेता जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नचिकेता जी का यह नवगीत – दीन-दलित के कीर्तन गाओराजा आएँगे।तोरन-बन्दनवार सजाओराजा आएँगे। उद्घाटन होगानूतन श्मशान घरों काहोगा मंगल-गान मूक,अँधे, बहरों का…