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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Nov 2024

    सूरज मेरी छत पे !

    मैं भी हूँ मंसूब किसी के क़त्ल से अब,सूरज मेरी छत पे चमकना भूल गया| कृष्ण कुमार तूर

  • 23rd Nov 2024

    मैं दुनिया भूल गया!

    आख़िर ये होना था आख़िर यही हुआ,दुनिया मुझ को और मैं दुनिया भूल गया| कृष्ण कुमार तूर

  • 23rd Nov 2024

    परिंदा भूल गया!

    किस के जिस्म की बारिश ने सैराब किया,क्यूँ उड़ना मौसम का परिंदा भूल गया| कृष्ण कुमार तूर

  • 23rd Nov 2024

    पढ़ना भूल गया!

    मैं तो था मौजूद किताब के लफ़्ज़ों में,वो ही शायद मुझ को पढ़ना भूल गया| कृष्ण कुमार तूर

  • 23rd Nov 2024

    ख़ुद को क़तरा!

    ये कैसी बे-आब ज़मीं का सामना था,ख़ुद को क़तरा क़तरे को दरिया भूल गया| कृष्ण कुमार तूर

  • 23rd Nov 2024

    एक दिया दहलीज़!

    एक दिया दहलीज़ पे रक्खा भूल गया,घर को लौट के आने वाला भूल गया| कृष्ण कुमार तूर

  • 23rd Nov 2024

    राजा आएँगे!

    आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीत कवि श्री नचिकेता जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| नचिकेता जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नचिकेता जी का यह नवगीत – दीन-दलित के कीर्तन गाओराजा आएँगे।तोरन-बन्दनवार सजाओराजा आएँगे। उद्घाटन होगानूतन श्मशान घरों काहोगा मंगल-गान मूक,अँधे, बहरों का…

  • 22nd Nov 2024

    अब किसी की ज़बाँ!

    अब किसी की ज़बाँ नहीं खुलती,रस्म जारी है मुँह-भराई की| राहत इंदौरी

  • 22nd Nov 2024

    बड़ी कमाई की!

    इश्क़ के कारोबार में हम ने,जान दे कर बड़ी कमाई की| राहत इंदौरी

  • 22nd Nov 2024

    क्या भलाई की!

    ज़िंदगी जैसे-तैसे काटनी है,क्या भलाई की क्या बुराई की| राहत इंदौरी

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