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राख में फिर ये !
दिल बुझा जितने थे अरमान सभी ख़ाक हुए,राख में फिर ये चमकते हैं शरारे कैसे| जावेद अख़्तर
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आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे!
आज मैं विख्यात हिन्दी गीतकार स्वर्गीय नरेंद्र शर्मा जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नरेंद्र शर्मा जी ने फिल्मों के लिए भी बहुत से गीत लिखे हैं, उनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नरेंद्र शर्मा जी का यह गीत – आज के बिछुड़े न जाने…
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पुकारे तो पुकारे कैसे!
हर तरफ़ शोर उसी नाम का है दुनिया में,कोई उस को जो पुकारे तो पुकारे कैसे| जावेद अख़्तर
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क्या जाने सितारे कैसे!
हाथ को हाथ नहीं सूझे वो तारीकी थी,आ गए हाथ में क्या जाने सितारे कैसे| जावेद अख़्तर
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कोई उम्र गुज़ारे कैसे!
हम ने ढूँडें भी तो ढूँडें हैं सहारे कैसे,इन सराबों पे कोई उम्र गुज़ारे कैसे| जावेद अख़्तर
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कि सारे खोने के ग़म!
मिसाल इस की कहाँ है कोई ज़माने में,कि सारे खोने के ग़म पाए हम ने पाने में| जावेद अख़्तर
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वही है का’बे में!
नज़र के ज़ाविए बदले है और कुछ भी नहीं,वही है का’बे में जो ‘नूर’ सोमनाथ में है| कृष्ण बिहारी नूर
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बस अब तो ‘इश्क़ है!
बस अब तो ‘इश्क़ है हिज्र-ओ-विसाल कुछ भी नहीं,ये टुकड़ा ज़ीस्त का दिन में है और न रात में है| कृष्ण बिहारी नूर
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पुलिस अफसर!
आज मैं जनकवि बाबा नागार्जुन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नागार्जुन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है बाबा नागार्जुन जी की यह कविता – जिनके बूटों से कीलित है, भारत माँ की छातीजिनके दीपों में जलती है, तरुण आँत की बाती ताज़ा मुंडों…