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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Nov 2024

    आँखें हैं हमारी नम !

    इस बार मिले हैं ग़म कुछ और तरह से भी,आँखें हैं हमारी नम कुछ और तरह से भी| हस्तीमल हस्ती

  • 30th Nov 2024

    मैं लखनऊ हो जाऊँ!

    नए मिज़ाज के शहरों में जी नहीं लगता,पुराने वक़्तों का फिर से मैं लखनऊ हो जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 30th Nov 2024

    अगर मैं ज़ख़्म की!

    कमी ज़रा सी भी मुझ में न कोई रह जाए,अगर मैं ज़ख़्म की सूरत हूँ तो रफ़ू हो जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 30th Nov 2024

    मैं भी सुर्ख़-रू हो जाऊँ!

    मिरी हथेली पे होंटों से ऐसी मोहर लगा,कि उम्र-भर के लिए मैं भी सुर्ख़-रू हो जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 30th Nov 2024

    वीरानियाँ हों ख़त्म मिरी!

    किसी तरह भी ये वीरानियाँ हों ख़त्म मिरी,शराब-ख़ाने के अंदर की हाव-हू जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 30th Nov 2024

    कभी जब याद आ जाते!

    आज मैं हिंदी  साहित्य के श्रेष्ठ आलोचक तथा हिन्दी कवि स्वर्गीय नामवर सिंह जी का एक नवगीत  शेयर कर रहा हूँ|   नामवर जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नामवर सिंह जी का यह नवगीत –  कभी जब याद आ जाते नयन को घेर लेते घन,स्वयं…

  • 29th Nov 2024

    वो आइना है तो मैं!

    मुझे पता तो चले मुझ में ऐब हैं क्या क्या,वो आइना है तो मैं उस के रू-ब-रू हो जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 29th Nov 2024

    मैं उस की आँखों में!

    बड़ा हसीन तक़द्दुस है उस के चेहरे पर,मैं उस की आँखों में झाँकूँ तो बा-वज़ू हो जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 29th Nov 2024

    किसी ग़रीब की!

    किसी ग़रीब की बरसों की आरज़ू हो जाऊँ,मैं इस सुरंग से निकलूँ तो आब-जू हो जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 29th Nov 2024

    ख़ौफ़ में डूबे हुए!

    ख़ौफ़ में डूबे हुए शहर की क़िस्मत है यही,मुंतज़िर रहता है हर शख़्स कि क्या होता है| मुनव्वर राना

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