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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Dec 2024

    जीवन की ही जय हो!

    आज मैं आधुनिक हिंदी कविता का आधार तैयार करने वाले शीर्ष कवि स्वर्गीय मैथिली शरण गुप्त जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ जिनको राष्ट्रकवि भी कहा जाता है। गुप्त जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मैथिली शरण गुप्त जी की यह कविता – मृषा…

  • 12th Dec 2024

    हौसला है ख़्वाबों का!

    देखें इस कशाकश का इख़्तिताम हो कब तक, जागने की ख़्वाहिश है हौसला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Dec 2024

    सिलसिला ख़्वाबों का!

    एक शब के टुकड़ों के नाम मुख़्तलिफ़ रखे,जिस्म-ओ-रूह का बंधन सिलसिला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Dec 2024

    फ़ासला है ख़्वाबों का!

    जागती हक़ीक़त तक रास्ता है ख़्वाबों का,दरमियाँ मिरे उन के फ़ासला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Dec 2024

    ज़िंदगी नाम है!

    हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत ‘फ़ानी’,ज़िंदगी नाम है मर मर के जिए जाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 12th Dec 2024

    आप की जान से दूर!

    कहते हैं क्या ही मज़े का है फ़साना ‘फ़ानी‘, आप की जान से दूर आप के मर जाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 12th Dec 2024

    किस की आँखें!

    किस की आँखें दम-ए-आख़िर मुझे याद आई हैं,दिल मुरक़्क़ा’ है छलकते हुए पैमाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 12th Dec 2024

    कहीं पाया न ठिकाना!

    हम ने छानी हैं बहुत दैर ओ हरम की गलियाँ,कहीं पाया न ठिकाना तिरे दीवाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 12th Dec 2024

    लौह दिल को ग़म!

    लौह दिल को ग़म-ए-उल्फ़त को क़लम कहते हैं,कुन है अंदाज़-ए-रक़म हुस्न के अफ़्साने का| फ़ानी बदायुनी

  • 12th Dec 2024

    हँसो भाई पेड़!

    आज मैं नवगीत विधा के प्रसिद्ध हस्ताक्षर स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी का एक नवगीत  शेयर कर रहा हूँ|  तिवारी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी का यह नवगीत – कहती है दूबहँसो भाई पेड़बाहर जितना देखते होधरती मेंधसों भाई पेड़ । जड़ें बहुत…

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