Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 2nd Jun 2025

    जाते हुए वो कोई!

    ‘शहज़ाद’ ये गिला ही रहा उस की ज़ात से,जाते हुए वो कोई गिला कर नहीं गया| शहज़ाद अहमद

  • 2nd Jun 2025

    वैसी ही बे-तलब है!

    वैसी ही बे-तलब है अभी मेरी ज़िंदगी,वो ख़ार-ओ-ख़स में आग लगा कर नहीं गया| शहज़ाद अहमद

  • 2nd Jun 2025

    रहने दिया न उस ने !

    रहने दिया न उस ने किसी काम का मुझे,और ख़ाक में भी मुझ को मिला कर नहीं गया| शहज़ाद अहमद

  • 2nd Jun 2025

    तब तक तो फूल जैसी!

    तब तक तो फूल जैसी ही ताज़ा थी उस की याद,जब तक वो पत्तियों को जुदा कर नहीं गया| शहज़ाद अहमद

  • 2nd Jun 2025

    वो आ कर नहीं गया!

    घर में है आज तक वही ख़ुश्बू बसी हुई,लगता है यूँ कि जैसे वो आ कर नहीं गया| शहज़ाद अहमद

  • 2nd Jun 2025

    शायद वो मिल ही जाए

    शायद वो मिल ही जाए मगर जुस्तुजू है शर्त,वो अपने नक़्श-ए-पा तो मिटा कर नहीं गया| शहज़ाद अहमद

  • 1st Jun 2025

    दीवार रास्ते में!

    बस इक लकीर खींच गया दरमियान में,दीवार रास्ते में बना कर नहीं गया| शहज़ाद अहमद

  • 1st Jun 2025

    चराग़ बुझा कर नहीं!

    यूँ लग रहा है जैसे अभी लौट आएगा,जाते हुए चराग़ बुझा कर नहीं गया| शहज़ाद अहमद

  • 1st Jun 2025

    एहसास तक भी हम!

    वो यूँ गया कि बाद-ए-सबा याद आ गई,एहसास तक भी हम को दिला कर नहीं गया| शहज़ाद अहमद

  • 1st Jun 2025

    आभार!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय शिव मंगल सिंह सुमन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। सुमन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिव मंगल सिंह सुमन जी की यह कविता – जिस जिससे पथ पर स्नेह मिलाउस उस राही को धन्यवाद।…

←Previous Page
1 … 400 401 402 403 404 … 1,528
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,132 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar