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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Dec 2024

    काया में परछाई जैसे!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी गीतकार स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। राजन जी की अधिक रचना मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का यह गीत  – मौसम में पुरवाई जैसेसूरज में गरमाई जैसेढकी-छुपी सी तुम हो मुझमेंकाया में परछाई जैसे नदिया को…

  • 19th Dec 2024

    ये जो लाल रंग पतंग!

    ये जो लाल रंग पतंग का सर-ए-आसमाँ है उड़ा हुआ, ये चराग़ दस्त-ए-हिना का है जो हवा में उस ने जला दिया| मुनीर नियाज़ी

  • 19th Dec 2024

    जो जहाँ में कोई न!

    यही आन थी मिरी ज़िंदगी लगी आग दिल में तो उफ़ न की,जो जहाँ में कोई न कर सका वो कमाल कर के दिखा दिया| मुनीर नियाज़ी

  • 19th Dec 2024

    कोई अपना वहम था!

    कोई ऐसी बात ज़रूर थी शब-ए-व’अदा वो जो न आ सका,कोई अपना वहम था दरमियाँ या घटा ने उस को डरा दिया| मुनीर नियाज़ी

  • 19th Dec 2024

    गुल सा खिला दिया!

    शब-ए-माहताब ने शह-नशीं पे अजीब गुल सा खिला दिया,मुझे यूँ लगा किसी हाथ ने मिरे दिल पे तीर चला दिया| मुनीर नियाज़ी

  • 19th Dec 2024

    मिरा अंजाम भी तो है!

    मुंकिर नहीं कोई भी वफ़ा का मगर ‘क़तील’,दुनिया के सामने मिरा अंजाम भी तो है| क़तील शिफ़ाई

  • 19th Dec 2024

    वो आँख सिर्फ़ आँख!

    ए तिश्ना-काम-ए-शौक़ इसे आज़मा के देख,वो आँख सिर्फ़ आँख नहीं जाम भी तो है| क़तील शिफ़ाई

  • 19th Dec 2024

    इक नाम उस का!

    हम जानते हैं जिस को किसी और नाम से,इक नाम उस का गर्दिश-ए-अय्याम भी तो है| क़तील शिफ़ाई

  • 19th Dec 2024

    रस्ते में झूमती हुई!

    कर तो लिया है क़स्द इबादत की रात का,रस्ते में झूमती हुई इक शाम भी तो है| क़तील शिफ़ाई

  • 19th Dec 2024

    आख़िर बुरी है क्या!

    आख़िर बुरी है क्या दिल-ए-नाकाम की ख़लिश,साथ उस के एक लज़्ज़त-ए-बे-नाम भी तो है| क़तील शिफ़ाई

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