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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Dec 2024

    याद नहीं करता!

    तुझे भूल गया कभी याद नहीं करता तुझ को,जो बात बहुत पहले करनी थी अब की है। शहरयार

  • 25th Dec 2024

    बात ये कब की है!

    तिरी दीद से आँखें जी भर के सैराब हुईं,किस रोज़ हुआ था ऐसा बात ये कब की है। शहरयार

  • 25th Dec 2024

    दिल तेरे मतलब की!

    सुनसान सड़क सन्नाटे और लम्बे साए,ये सारी फ़ज़ा ऐ दिल तेरे मतलब की है। शहरयार

  • 25th Dec 2024

    पंछी में गाने का गुन!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रवींद्र भ्रमर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। भ्रमर जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवींद्र भ्रमर जी की यह कविता   – पँछी में गाने का गुन हैदो तिनके चुनकरवह तृप्त जहाँ होता हैगीतों की कड़ियाँबोता है !सूखा पेड़कँटीली टहनीबियाबान,…

  • 24th Dec 2024

    आहट जो सुनाई दी है!

    आहट जो सुनाई दी है हिज्र की शब की है,ये राय अकेली मेरी नहीं है सब की है। शहरयार

  • 24th Dec 2024

    गर्दिश-ए-वक़्त का!

    गर्दिश-ए-वक़्त का कितना बड़ा एहसाँ है कि आज,ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें। शहरयार

  • 24th Dec 2024

    दिल में वो दर्द न!

    दिल में वो दर्द न आँखों में वो तुग़्यानी है,जाने किस सम्त ये दुनिया लिए जाती है हमें। शहरयार

  • 24th Dec 2024

    मंज़िल-ए-बे-नाम!

    फिर कहीं ख़्वाब ओ हक़ीक़त का तसादुम होगा,फिर कोई मंज़िल-ए-बे-नाम बुलाती है हमें। शहरयार

  • 24th Dec 2024

    हँसी आती है हमें!

    मरकज़-ए-दीदा-ओ-दिल तेरा तसव्वुर था कभी,आज इस बात पे कितनी हँसी आती है हमें। शहरयार

  • 24th Dec 2024

    रंग दिखाती है हमें!

    तुझ से बिछड़े हैं तो अब किस से मिलाती है हमें,ज़िंदगी देखिए क्या रंग दिखाती है हमें। शहरयार

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