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मुझे क्या मलाल है!
घर से चला तो दिल के सिवा पास कुछ न था,क्या मुझ से खो गया है मुझे क्या मलाल है| जावेद अख़्तर
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क्या मेरा हाल है!
मैं ख़ुद भी सोचता हूँ ये क्या मेरा हाल है,जिस का जवाब चाहिए वो क्या सवाल है| जावेद अख़्तर
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जवानी की शरारत!
मुझ को ख़ुद अपनी जवानी की क़सम है कि ये इश्क़,इक जवानी की शरारत के सिवा कुछ भी नहीं| जाँ निसार अख़्तर
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एक ख़ामोश क़यामत!
दिल में वो शोरिश-ए-जज़्बात कहाँ तेरे बग़ैर,एक ख़ामोश क़यामत के सिवा कुछ भी नहीं| जाँ निसार अख़्तर
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नववर्ष -2025 की शुभकामना
समय को कौन रोक सकता है जी! दिन, माह, वर्ष बदलते ही जाते हैं, 2024 को भी जाना था, चला गया है। किसी कवि की काव्य पंक्ति पहले भी मैंने दोहराई हैं – आने वाले स्वागत, जाने वाले विदा अगले चौराहे पर इंतज़ार, शुक्रिया। बहुत से लोग यही शिकायत करते रहते हैं कि दिन, माह,…
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मिरी दुनिया से गुज़र!
फ़ित्ना-ए-अक़्ल के जूया मिरी दुनिया से गुज़र,मेरी दुनिया में मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं| जाँ निसार अख़्तर
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मय-कशी अब मिरी!
मय-कशी अब मिरी आदत के सिवा कुछ भी नहीं,ये भी इक तल्ख़ हक़ीक़त के सिवा कुछ भी नहीं| जाँ निसार अख़्तर
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तुम्हीं ने शाइरी दी है!
कहाँ मुमकिन था कोई काम हम जैसे दिवानों से,तुम्हीं ने गीत लिखवाए तुम्हीं ने शाइरी दी है| जाँ निसार अख़्तर
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हर इक दरवेश ने !
मिरी आवारगी भी इक करिश्मा है ज़माने में,हर इक दरवेश ने मुझ को दुआ-ए-ख़ैर ही दी है| जाँ निसार अख़्तर
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मिरी आँखों को आँसू!
मोहब्बत ना-रवा तक़्सीम की क़ाएल नहीं फिर भी,मिरी आँखों को आँसू तेरे होंटों को हँसी दी है| जाँ निसार अख़्तर