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हम वो परवाने हैं!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश द्वारा फिल्म- दिल ने फिर याद किया के गीत का एक अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ जो मुकेश जी न गाया था- हम वो परवाने हैं जो शमआ का दम भरते हैं, हुस्न की आग में खामोश जला करते हैं। आशा है आपको…
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कब और क्यों- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…
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मिलाते हुए मर जाते हैं
हम हैं वो टूटी हुई कश्तियों वाले ‘ताबिश’,जो किनारों को मिलाते हुए मर जाते हैं। अब्बास ताबिश
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मोहब्बत की कहानी!
ये मोहब्बत की कहानी नहीं मरती लेकिन,लोग किरदार निभाते हुए मर जाते हैं। अब्बास ताबिश
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उनके भी क़त्ल का!
उन के भी क़त्ल का इल्ज़ाम हमारे सर है,जो हमें ज़हर पिलाते हुए मर जाते हैं। अब्बास ताबिश
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किस तरह लोग!
किस तरह लोग चले जाते हैं उठ कर चुप-चाप,हम तो ये ध्यान में लाते हुए मर जाते हैं। अब्बास ताबिश
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निभाते हुए मर जाते हैं!
हम हैं सूखे हुए तालाब पे बैठे हुए हंस,जो तअ’ल्लुक़ को निभाते हुए मर जाते हैं। अब्बास ताबिश