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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Feb 2025

    ग़म से वाबस्ता है!

    ख़ू है अज़-बस कि आशिक़ी दिल की,ग़म से वाबस्ता है ख़ुशी दिल की| हसरत मोहानी

  • 13th Feb 2025

    उड़ गई मुफ़्त में!

    आप ने क़द्र कुछ न की दिल की,उड़ गई मुफ़्त में हँसी दिल की| हसरत मोहानी

  • 13th Feb 2025

    टूटता रहता हूँ!

    मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा ‘शकील’,टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

  • 13th Feb 2025

    तू भी खो जाएगी!

    तू भी खो जाएगी टपके हुए आँसू की तरह,देख ऐ गर्दिश-ए-अय्याम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

  • 13th Feb 2025

    अपनी ख़ुशियाँ मिरे!

    अपनी ख़ुशियाँ मिरे आलाम से मंसूब न कर,मुझ से मत माँग मिरा नाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

  • 13th Feb 2025

    हम तो मस्त फकीर!

    आज मैं हिंदी साहित्य में तथा फिल्मों के लिए अनेक अमर गीत देने वाले स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। नीरज जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का यह गीत – हम तो मस्त फकीर, हमारा…

  • 12th Feb 2025

    इक धूल भरी शाम!

    तू नई सुबह के सूरज की है उजली सी किरन,मैं हूँ इक धूल भरी शाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

  • 12th Feb 2025

    हो जाएगा बदनाम!

    मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल,तू भी हो जाएगा बदनाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

  • 12th Feb 2025

    मकान देखता है!

    मैं जब मकान के बाहर क़दम निकालता हूँ,अजब निगाह से मुझ को मकान देखता है| शकील आज़मी

  • 12th Feb 2025

    मेरी ज़बान देखता है!

    यही वो शहर जो मेरे लबों से बोलता था,यही वो शहर जो मेरी ज़बान देखता है| शकील आज़मी

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