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टूटता रहता हूँ!
मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा ‘शकील’,टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी
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अपनी ख़ुशियाँ मिरे!
अपनी ख़ुशियाँ मिरे आलाम से मंसूब न कर,मुझ से मत माँग मिरा नाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी
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हम तो मस्त फकीर!
आज मैं हिंदी साहित्य में तथा फिल्मों के लिए अनेक अमर गीत देने वाले स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। नीरज जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का यह गीत – हम तो मस्त फकीर, हमारा…
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इक धूल भरी शाम!
तू नई सुबह के सूरज की है उजली सी किरन,मैं हूँ इक धूल भरी शाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी
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हो जाएगा बदनाम!
मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल,तू भी हो जाएगा बदनाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी
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मेरी ज़बान देखता है!
यही वो शहर जो मेरे लबों से बोलता था,यही वो शहर जो मेरी ज़बान देखता है| शकील आज़मी