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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th Feb 2025

    कल करेंगे हिसाब!

    आज पीने दे और पीने दे,कल करेंगे हिसाब ऐ साक़ी। सुदर्शन फाकिर

  • 19th Feb 2025

    जाम भर दे!

    जाम भर दे गुनाहगारों के,ये भी है इक सवाब ऐ साक़ी। सुदर्शन फाकिर

  • 19th Feb 2025

    है ज़माना ख़राब!

    मैकदा छोड़ कर कहाँ जाऊँ,है ज़माना ख़राब ऐ साक़ी। सुदर्शन फाकिर

  • 19th Feb 2025

    या सुराही लगा मेरे!

    या सुराही लगा मेरे मुँह से,या उलट दे नक़ाब ऐ साक़ी। सुदर्शन फाकिर

  • 19th Feb 2025

    ढल गया आफ़ताब!

    ढल गया आफ़ताब ऐ साक़ी,ला पिला दे शराब ऐ साक़ी। सुदर्शन फाकिर

  • 19th Feb 2025

    जब-जब सिर उठाया!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। सर्वेश्वर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।                लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता – जब-जब सिर उठायाअपनी चौखट से टकराया।मस्तक पर लगी चोट,मन में उठी कचोट, अपनी ही भूल…

  • 18th Feb 2025

    अब तो ये बात हुई!

    यूँ तो पहले भी कई दोस्त दग़ा देते थे,अब तो ये बात हुई ‘आम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही

  • 18th Feb 2025

    उलट दी है नक़ाब!

    जाने क्या सोच के उस बुत ने उलट दी है नक़ाब,और फिर वो भी सर-ए-बाम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही

  • 18th Feb 2025

    उन की आँखों में है!

    जो मुझे देख के नज़रों को चुरा लेते थे,उन की आँखों में है पैग़ाम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही

  • 18th Feb 2025

    आज-कल है वहाँ!

    लाखों तूफ़ान कि जिस दिल में बसे रहते थे,आज-कल है वहाँ आराम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही

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