-
इस डूबते सूरज से तो!
इस डूबते सूरज से तो उम्मीद ही क्या थी,हँस हँस के सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
-
ख़ामोश किनारों ने भी!
तूफ़ान का शेवा तो है कश्ती को डुबोना,ख़ामोश किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
-
पुर-कैफ़ बहारों ने भी!
पुर-कैफ़ बहारों ने भी दिल तोड़ दिया है,हाँ उन के नज़ारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
-
बन गई नक़्श जो!
बन गई नक़्श जो सुर्ख़ी तिरे अफ़्साने की,वो शफ़क़ है कि धनक है कि हिना है क्या है| नक़्श लायलपुरी
-
वो बशर है कि!
दिल ख़तावार-ए-नज़र पारसा तस्वीर-ए-अना,वो बशर है कि फ़रिश्ता है ख़ुदा है क्या है| नक़्श लायलपुरी
-
ये तिरा नाज़ है
होश में ला के मिरे होश उड़ाने वाले,ये तिरा नाज़ है शोख़ी है अदा है क्या है| नक़्श लायलपुरी
-
यों अन्धेरा अभी पी रहा हूँ!
आज मैं हिंदी नवगीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। शंभुनाथ जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत – यों अन्धेरा अभी पी रहा हूँ, रोशनी के लिए जी रहा हूँ । एक अन्धे…
-
नाम होंटों पे तिरा!
नाम होंटों पे तिरा आए तो राहत सी मिले,तू तसल्ली है दिलासा है दुआ है क्या है| नक़्श लायलपुरी
-
तू कोई झील है!
रूह की प्यास बुझा दी है तिरी क़ुर्बत ने,तू कोई झील है झरना है घटा है क्या है| नक़्श लायलपुरी
-
तेरी आँखों में कई!
तेरी आँखों में कई रंग झलकते देखे,सादगी है कि झिझक है कि हया है क्या है| नक़्श लायलपुरी