Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 24th Mar 2025

    या जगा देते हैं ज़र्रों!

    या जगा देते हैं ज़र्रों के दिलों में मय-कदे, या बना लेते हैं मेहर-ओ-माह को पैमाना हम| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Mar 2025

    रफ़्ता रफ़्ता बन गए!

    मिटते मिटते दे गए हम ज़िंदगी को रंग-ओ-नूर,रफ़्ता रफ़्ता बन गए इस अहद का अफ़्साना हम| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Mar 2025

    आए हैं ज़िंदाँ में भी!

    राह में फ़ौजों के पहरे सर पे तलवारों की छाँव,आए हैं ज़िंदाँ* में भी बा-शौकत-ए-शाहाना हम|*Prison अली सरदार जाफ़री

  • 24th Mar 2025

    गुलज़ार हर वीराना!

    ख़ून-ए-दिल से चश्म-ए-तर तक चश्म-ए-तर से ता-ब-ख़ाक,कर गए आख़िर गुल-ओ-गुलज़ार हर वीराना हम| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Mar 2025

    गर्दिश-ए-पैमाना हम!

    मस्ती-ए-रिंदाना हम सैराबी-ए-मय-ख़ाना हम,गर्दिश-ए-तक़दीर से हैं गर्दिश-ए-पैमाना हम| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Mar 2025

    काग़ज़ बिखर रहे हैं!

    किस तरह जम्अ’ कीजिए अब अपने आप को,काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के| आदिल मंसूरी

  • 24th Mar 2025

    घोर धनुर्धर, बाण तुम्हारा!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय मुक्तिबोध जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। मुक्तिबोध जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए प्रस्तुत है मुक्तिबोध जी की ये कविता-  घोर धनुर्धर, बाण तुम्हारा सब प्राणों को पार करेगातेरी प्रत्यंचा का कम्पन सूनेपन का भार हरेगाहिमवत, जड़, निःस्पन्द हृदय के…

  • 23rd Mar 2025

    दरिया रवाँ-दवाँ हैं!

    बस तिश्नगी की आँख से देखा करो उन्हें,दरिया रवाँ-दवाँ हैं चमकते सराब के| आदिल मंसूरी

  • 23rd Mar 2025

    जाले थे ख़्वाब के!

    सोए तो दिल में एक जहाँ जागने लगा,जागे तो अपनी आँख में जाले थे ख़्वाब के। आदिल मंसूरी

  • 23rd Mar 2025

    नक़्श उठ आए गुलाब के!

    फूलों की सेज पर ज़रा आराम क्या कियाउस गुल-बदन पे नक़्श उठ आए गुलाब के आदिल मंसूरी

←Previous Page
1 … 320 321 322 323 324 … 1,389
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar