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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Apr 2025

    न रंगीनियों में!

    न रंगीनियों में न रानाइयों में,नज़र घिर गई अपनी परछाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    चंद अंगड़ाइयों में!

    न आया मज़ा शब की तन्हाइयों में,सहर हो गई चंद अंगड़ाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    वही सरकार हो जाए!

    मोहब्बत से तुम्हें सरकार कहते हैं वगरना हम,निगाहें डाल दें जिस पर वही सरकार हो जाए| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    वो ज़ुल्फ़ें साँप हैं!

    वो ज़ुल्फ़ें साँप हैं बे-शक अगर ज़ंजीर बन जाएँ,मोहब्बत ज़हर है बे-शक अगर आज़ार हो जाए| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    मिरा दीदार हो जाए!

    ज़माने को तमन्ना है तिरा दीदार करने की,मुझे ये फ़िक्र है मुझ को मिरा दीदार हो जाए| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    ज़माने से कहो कुछ!

    ज़माने से कहो कुछ साइक़ा-रफ़्तार हो जाए,हमारे साथ चलने के लिए तय्यार हो जाए| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    सियाही ख़ून बन जाए!

    सलाम उस पर अगर ऐसा कोई फ़नकार हो जाए,सियाही ख़ून बन जाए क़लम तलवार हो जाए| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    उसने मेरे बेगानेपन!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ नवगीतकार श्री नचिकेता जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। नचिकेता जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नचिकेता जी का यह नवगीत – उसने मेरेबेगानेपन को हीछेड़ दियाघनी उमस मेंकभी न उसनेपंखा हाँका हैलसिया गए भात कोदेसी घी से छौंका…

  • 11th Apr 2025

    सुधर गया हूँ मैं!

    कू-ए-जानाँ में सोग बरपा है, कि अचानक सुधर गया हूँ मैं| जौन एलिया

  • 11th Apr 2025

    ख़ुद से डर गया हूँ मैं!

    तुम से जानाँ मिला हूँ जिस दिन से,बे-तरह ख़ुद से डर गया हूँ मैं| जौन एलिया

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