-
भूल जाओ वामन!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवियित्री सुश्री नीलम सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नीलम जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री नीलम सिंह जी की यह कविता – नहीं काट सकतेअतल में धँसीमेरी जड़ों कोतुम्हारी नैतिकता केजंग लगे भोथरे हथियार मत आँको मेरा…
-
अपना सितारा देखना!
किस शबाहत को लिए आया है दरवाज़े पे चाँद, ऐ शब-ए-हिज्राँ ज़रा अपना सितारा देखना| परवीन शाकिर
-
जाते जाते उस का वो!
यूँ बिछड़ना भी बहुत आसाँ न था उस से मगर,जाते जाते उस का वो मुड़ कर दोबारा देखना| परवीन शाकिर
-
मैं समुंदर देखती हूँ!
बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना, मैं समुंदर देखती हूँ तुम किनारा देखना| परवीन शाकिर
-
मिरे दिल की चीख़ें!
अरे सुनने वालो ये नग़्मे नहीं हैं,मिरे दिल की चीख़ें हैं शहनाइयों में| कैफ़ भोपाली
-
नया तरीका!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ जनकवि बाबा नागार्जुन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नागार्जुन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है नागार्जुन जी की यह कविता – दो हज़ार मन गेहूँ आया दस गाँवों के नामराधे चक्कर लगा काटने, सुबह हो गई शाम सौदा पटा…
-
तुम भी हो रुस्वाइयों में
मुझे मुस्कुरा मुस्कुरा कर न देखो, मिरे साथ तुम भी हो रुस्वाइयों में| कैफ़ भोपाली