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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th Apr 2025

    जो तेरे शहर में!

    उन्हीं पे सारे मसाइब* का बोझ रक्खा है,जो तेरे शहर में ईमान ले के आए हैं|*मुसीबतें मंज़र भोपाली

  • 19th Apr 2025

    क्या भाया!

    आज मैं हिंदी के विख्यात कवि स्वर्गीय श्री नेमिचंद्र जैन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नेमिचंद्र जैन जी की यह कविता– क्या भाया ?अनजाने मन क्यों इस कोलाहल में खिंच कर बह आया ?वे वन की संध्याएँ निर्जनमदिर-अरुण…

  • 18th Apr 2025

    जो पारसा हो तो!

    जो पारसा हो तो क्यूँ इम्तिहाँ से डरते हो,हम ए’तिबार का मीज़ान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 18th Apr 2025

    ये ज़ख़्म-ए-दिल नहीं!

    ये ज़ख़्म-ए-दिल नहीं एहसान की निशानी है,हम उस निगाह का एहसान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 18th Apr 2025

    धूप है ख़यालों की!

    हमारे पास फ़क़त धूप है ख़यालों की,झुलसते ख़्वाबों की दुक्कान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 18th Apr 2025

    कि हम भी ‘मीर’ का!

    इन आँसुओं का कोई क़द्र-दान मिल जाए,कि हम भी ‘मीर’ का दीवान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 18th Apr 2025

    कि आप आइना!

    जवाब दे न सकेगा हमारी बातों का,कि आप आइना हैरान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 18th Apr 2025

    बुझे बुझे से कुछ!

    चराग़-ए-क़ुर्ब* से कर दीजिए उन्हें रौशन,बुझे बुझे से कुछ अरमान ले के आए हैं|*Nearness मंज़र भोपाली

  • 18th Apr 2025

    कि हम चराग़ भी!

    हवा ने वार किया तो जवाब पाएगी,कि हम चराग़ भी तूफ़ान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 18th Apr 2025

    मैं सब दिन पाषाण नहीं था!

    आज मैं हिंदी के विख्यात कवि स्वर्गीय नरेंद्र शर्मा जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। नरेंद्र शर्मा जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नरेंद्र शर्मा जी का यह गीत– मैं सब दिन पाषाण नहीं था किसी शापवश हो निर्वासित,लीन हुई चेतनता मेरी;मन-मन्दिर का दीप…

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