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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Apr 2025

    कहीं हवा ही न हो!

    सफ़र में है जो अज़ल से ये वो बला ही न हो,किवाड़ खोल के देखो कहीं हवा ही न हो| मुनीर नियाज़ी

  • 28th Apr 2025

    राधिका दिल से – जुमांजी

    ऊपर जो शीर्षक दिया गया है उसमें टी वी पर देखे जाने वाले दो कार्यक्रमों के नाम हैं, एक टी वी सीरियल है ‘राधिका दिल से’ जो सोनी टीवी पर आजकल दिखाया जा रहा है और दूसरी एक अमेरिकन फिल्म है ‘JUMANJI’ जिसके शायद तीन भाग दिखाए जा चुके हैं और चौथा भाग रिलीज़ होने…

  • 28th Apr 2025

    आंगन का पंछी!

    आज मैं श्रेष्ठ नवगीत कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत– आँगन का पंछी चढ़ा मुड़ेरे परजंगल को अपना घर बतलाता हैकुछ ऐसी हवा बही ज़हरीली-सीसारा का सारा…

  • 27th Apr 2025

    होते होते जीने के भी!

    हम भी ‘मुनीर’ अब दुनिया-दारी कर के वक़्त गुज़ारेंगे,होते होते जीने के भी लाख बहाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी

  • 27th Apr 2025

    राज़ छुपाने आ जाते!

    ज़े के रेशमी रुमालों को किस किस की नज़रों से छुपाएँ,कैसे हैं वो लोग जिन्हें ये राज़ छुपाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी

  • 27th Apr 2025

    कौन सा वो जादू है!

    कौन सा वो जादू है जिस से ग़म की अँधेरी सर्द गुफा में,लाख निसाई साँस दिलों के रोग मिटाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी

  • 27th Apr 2025

    फूल चढ़ाने आ जाते!

    जिन लोगों ने उन की तलब में सहराओं की धूल उड़ाई,अब ये हसीं उन की क़ब्रों पर फूल चढ़ाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी

  • 27th Apr 2025

    शाम आते ही आँखों!

    दिन भर जो सूरज के डर से गलियों में छुप रहते हैं,शाम आते ही आँखों में वो रंग पुराने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी

  • 27th Apr 2025

    कैसे कैसे लोग हमारे!

    जब भी घर की छत पर जाएँ नाज़ दिखाने आ जाते हैं,कैसे कैसे लोग हमारे जी को जलाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी

  • 27th Apr 2025

    बर्बादी के अफ़्साने!

    सुनेगा जब ज़माना मेरी बर्बादी के अफ़्साने,तुम्हारा नाम भी आएगा मेरे नाम से पहले| क़तील शिफ़ाई

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