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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Oct 2025

    गीत- भोजन पांच सितारा स्थल में!

    आज प्रस्तुत है हल्के-फुल्के मूड में लिखा गया एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- भोजन पांच सितारा स्थल में! कुछ थे अतिथि खानदानी सेमौका पाकर रौब दिखातेकुछ थे वहाँ मेहरबानी सेपूर्ण सहज वे कब हो पाते सबका संगम, दावत गृह में, खाना मूल वही होता परकितने नए नाम-रूपों मेंयुवक-युवतियां वहाँ सजाते सभी खाद्य निश्चित…

  • 7th Oct 2025

    यूँ तुझे देख के!

    यूँ तुझे देख के चौंक उठती हैं सोई यादें,जैसे सन्नाटे में आवाज़ लगा दे कोई। नज़ीर क़ैसर

  • 7th Oct 2025

    तस्वीर बना दे कोई!

    दिल की तख़्ती सर-ए-बाज़ार लिए फिरता हूँ,काश इस पर तिरी तस्वीर बना दे कोई। नज़ीर क़ैसर

  • 7th Oct 2025

    बातें दिल की कौन सुनेगा!

    आज प्रस्तुत है एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- बातें दिल की कौन सुनेगाहै यह बौद्धिक जन की बस्ती! दिल की बातें करने वालेलुटते जाते, पिटते जातेबहुधा अपमानित होकर भीरहते गीत प्रेम के गाते, छोडो ये झंझट अतीत केसीखो नई प्रक्रिया सस्ती। यहाँ बुद्धि व्यवहार चलेगा भावुकता को दूर भगाओजो गाने दुनिया गाती हैतुम…

  • 6th Oct 2025

    ढूँढता फिरता हूँ!

    ढूँढता फिरता हूँ यूँ अपने ही क़दमों के निशाँजैसे मुझ को मिरी नज़रों से छुपा दे कोई। नज़ीर क़ैसर

  • 6th Oct 2025

    मेरा पता दे कोई!

    ग़रज़ इस से नहीं वो कौन है किस भेस में है,मैं कहाँ पर हूँ मुझे मेरा पता दे कोई। नज़ीर क़ैसर

  • 6th Oct 2025

    मेरी आँखों को मिरी!

    मेरी आँखों को मिरी शक्ल दिखा दे कोई,काश मुझ को मिरा एहसास दिला दे कोई। नज़ीर क़ैसर

  • 6th Oct 2025

    बड़ा काम नहीं है!

    ‘रौशन’ ये मोहब्बत की है दुनिया ही निराली,मिट जाना यहाँ कोई बड़ा काम नहीं है। रौशन बनारसी

  • 6th Oct 2025

    इस शाम के बा’द!

    ज़ुल्फ़ें रुख़-ए-पुर-नूर पे कहती हैं बिखर के,इस शाम के बा’द और कोई शाम नहीं है। रौशन बनारसी

  • 6th Oct 2025

    मेरे यू ट्यूब चैनल पर

    मैंने अपने यू ट्यूब चैनल पर अपनी आवाज़ में मेरे प्रिय गायक मुकेश जी का एक और गीत अपलोड किया है, आज वही शेयर कर रहा हूँ- ओह रे ताल मिले नदी के जल में https://youtu.be/m_eU_UTwQ4c?si=480jSyRlIs4C20Du आशा है आपको पसन्द आएगा।

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