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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th May 2025

    तेरी बंदगी से मिरा!

    तू ख़ुदा-ए-हुस्न-ओ-जमाल है तो हुआ करे, तेरी बंदगी से मिरा भला नहीं हो रहा| अज़हर इक़बाल

  • 15th May 2025

    कोई आइना हो जो!

    कोई आइना हो जो ख़ुद से मुझ को मिला सके, मिरा अपने-आप से सामना नहीं हो रहा| अज़हर इक़बाल

  • 15th May 2025

    भूल गए सारी बातें!

    तुम जो गए तो भूल गए सारी बातें, वैसे दिल में क्या क्या चलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 15th May 2025

    आँखों में जंगल सा!

    राख हुई जाती है सारी हरियाली, आँखों में जंगल सा जलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 15th May 2025

    मौसम पल पल!

    मंज़र मंज़र जी लो जितना जी पाओ, मौसम पल पल रंग बदलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 15th May 2025

    सन्नाटा आवाज़ में !

    सरगोशी को कान तरसते रहते हैं,सन्नाटा आवाज़ में ढलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 15th May 2025

    तुम मुझे क्षमा करो!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय राजकमल चौधरी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।   लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजकमल चौधरी जी की यह कविता  – बहुत अंधी थीं मेरी प्रार्थनाएँ।मुस्कुराहटें मेरी विवशकिसी भी चंद्रमा के चतुर्दिकउगा नहीं पाई आकाश-गंगालगातार फूल- चंद्रमुखी!बहुत…

  • 14th May 2025

    वैसे वैसे जिस्म !

    जैसे जैसे यादों कि लौ बढ़ती है,वैसे वैसे जिस्म पिघलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 14th May 2025

    दिल की गली में!

    दिल की गली में चाँद निकलता रहता है, एक दिया उम्मीद का जलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 14th May 2025

    हमें तो ज़ात भी!

    तुम अपना नाम बता कर ही छूट जाते हो,हमें तो ज़ात भी अपनी बतानी पड़ती है| हसीब सोज़

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