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कोई आइना हो जो!
कोई आइना हो जो ख़ुद से मुझ को मिला सके, मिरा अपने-आप से सामना नहीं हो रहा| अज़हर इक़बाल
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भूल गए सारी बातें!
तुम जो गए तो भूल गए सारी बातें, वैसे दिल में क्या क्या चलता रहता है| अज़हर इक़बाल
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तुम मुझे क्षमा करो!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय राजकमल चौधरी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजकमल चौधरी जी की यह कविता – बहुत अंधी थीं मेरी प्रार्थनाएँ।मुस्कुराहटें मेरी विवशकिसी भी चंद्रमा के चतुर्दिकउगा नहीं पाई आकाश-गंगालगातार फूल- चंद्रमुखी!बहुत…