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टहलने जाना मुश्किल!
क़ातिल की नज़रों से हम महफूज़ कहाँ,सुबहो-शाम टहलने जाना मुश्किल है। शंभुनाथ तिवारी
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जिनके दिल में कद्र!
जिनके दिल में कद्र नहीं इनसानों की,उनकी जानिब हाथ बढ़ाना मुश्किल है। शंभुनाथ तिवारी
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समझाना मुश्किल है!
बेहतर है कि खुद को ही तब्दील करें,सारी दुनिया को समझाना मुश्किल है। शंभुनाथ तिवारी
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रिश्तों का चल पाना!
जिनकी बुनियादें खुदग़र्ज़ी पर होंगी,ऐसे रिश्तों का चल पाना मुश्किल है। शंभुनाथ तिवारी
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एक मीनार उठती रही!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि तथा हिंदी नवगीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। सिंह जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत – एक मीनार उठती रही एक मीनार ढहती रही…