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मृत्तिका दीप!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शिवमंगल सिंह सुमन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सुमन जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिवमंगल सिंह सुमन जी की यह कविता – मृत्तिका का दीप तब तक जलेगा अनिमेषएक भी कण स्नेह का जब तक…
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ठहरा हुआ दरिया है!
दिल से जो छटे बादल तो आँख में सावन है,ठहरा हुआ दरिया है बहता हुआ पानी है| बशीर बद्र
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शीशे की जवानी है!
इक ज़ेहन-ए-परेशाँ में ख़्वाब-ए-ग़ज़लिस्ताँ है,पत्थर की हिफ़ाज़त में शीशे की जवानी है| बशीर बद्र
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बहता हुआ पानी है!
पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है, ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है| बशीर बद्र
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सुना है बच्चों में!
हमेशा मंदिर-ओ-मस्जिद में वो नहीं रहता,सुना है बच्चों में छुप कर वो खेलता भी है| निदा फ़ाज़ली
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वो ख़ुश-लिबास भी!
वो ख़ुश-लिबास भी ख़ुश-दिल भी ख़ुश-अदा भी है,मगर वो एक है क्यूँ उस से ये गिला भी है| निदा फ़ाज़ली
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सूख रहे धान!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री शिवबहादुर सिंह भदौरिया जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कविताएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री शिवबहादुर सिंह भदौरिया जी की यह कविता – सूख रहे धान और पोखर का जल,चलो पिया गुहरायें बादल-बादल। रंग की नुमाइश इन्द्र नहीं लाये,नदी नहीं…