Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 16th Nov 2025

    तिरे बग़ैर समुंदर को!

    सफ़ीना ग़र्क़ ही करना पड़ा हमें आख़िर,तिरे बग़ैर समुंदर को पार क्या करते| अज़हर इक़बाल

  • 16th Nov 2025

    कविता को साधना!

    प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- हर कदम अभिव्यक्ति काकब कारगर निकला,चेतना के शून्य कापत्थर नहीं पिघला। तनिक कविता का मसौदाजम नहीं पायाएक भाव उधर गयादूजा इधर आया, और फिर जब साधने मेंलगे थे कविवरबीच से तब कसमसाकरशब्द एक उछला। वस्त्र जो हम चाहते हैंपहन ले कवितादेखते हैं अधिकतरउसको नहीं…

  • 15th Nov 2025

    तेरे हिसार से ख़ुद को!

    हुई न ख़त्म तेरी रहगुज़ार क्या करते, तेरे हिसार से ख़ुद को फ़रार क्या करते| अज़हर इक़बाल

  • 15th Nov 2025

    जब तक है दिलों में!

    जब तक है दिलों में सच्चाई सब नाज़-ओ-नियाज़ वहीं तक हैंजब ख़ुद-ग़र्ज़ी आ जाती है जुल होते हैं घातें होती हैं आरज़ू लखनवी

  • 15th Nov 2025

    जो कुछ भी ख़ुशी से!

    जो कुछ भी ख़ुशी से होता है ये दिल का बोझ न बन जाए,पैमान-ए-वफ़ा भी रहने दो सब झूटी बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 15th Nov 2025

    हँसने में जो आँसू !

    हँसने में जो आँसू आते हैं नैरंग-ए-जहाँ बतलाते हैं,हर रोज़ जनाज़े जाते हैं हर रोज़ बरातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 15th Nov 2025

    पहरों बातें होती हैं!

    जो कान लगा कर सुनते हैं क्या जानें रुमूज़ मोहब्बत के,अब होंट नहीं हिलने पाते और पहरों बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 15th Nov 2025

    ये बीसवीं सदी है!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी का यह श्रेष्ठ नवगीत शेयर कर रहा हूँ- आंखों में सिर्फ बादल, सुनसान बिजलियां हैंअंगार हैं अधर पर, सब सांस आंधियां हैंरग-रग में तैरती सी इक आग की नदी है,ये बीसवीं सदी है! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 15th Nov 2025

    हम भी दुखी, तुम भी दुखी !

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।प्रभाकर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत- रातरानी रात मेंदिन में खिले सूरजमुखीकिन्‍तु फिर भी आज कलहम भी दुखीतुम भी दुखी !…

  • 14th Nov 2025

    ऐसी रातें होती हैं!

    क़िस्मत जागे तो हम सोएँ क़िस्मत सोए तो हम जागें, दोनों ही को नींद आए जिस में कब ऐसी रातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

←Previous Page
1 … 250 251 252 253 254 … 1,525
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar