Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 18th Nov 2025

    हम तेरे शहर में !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में ग़ुलाम अली जी की गाई ये प्रसिद्ध ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ- हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह सिर्फ एक बार मुलाक़ात का मौका दे दे। आशा है आपको ये पसंद आएगा,धन्यवाद।

  • 18th Nov 2025

    चाँद की लाश कहीं!

    सुब्ह-दम सुर्ख़ उजाला है खुले पानी में,चाँद की लाश कहीं से भी उभर सकती है| अज़हर फ़राग़

  • 18th Nov 2025

    आर्थिक संबंधों का गीत!

    अपना एक पुराना नवगीत अचानक याद आया, मैंने शायद इसे शेयर नहीं किया है- हैं कहीं महाजन हमकहीं हैं फक़ीरमिटते संबंध ज्योंधुएं की लकीर। अड़ियल मेहमानबना बैठा संत्रासजेबों से निकल गएकितने विश्वास, शो-केसों मेंज़िंदगी जा सजीपढते हम रह गएहाथ की लकीर। खुशियों के आयोजनभार हो गएजड़ता के बंधनस्वीकार हो गए,बुझे हुए सपनेज्यों होली की राखउड़ती…

  • 17th Nov 2025

    हो अगर मौज में !

    हो अगर मौज में हम जैसा कोई अंधा फ़क़ीर,एक सिक्के से भी तक़दीर सँवर सकती है| अज़हर फ़राग़

  • 17th Nov 2025

    मेरी ख़्वाहिश है कि!

    मेरी ख़्वाहिश है कि फूलों से तुझे फ़त्ह करूँ, वर्ना ये काम तो तलवार भी कर सकती है| अज़हर फ़राग़

  • 17th Nov 2025

    ये मोहब्बत तो!

    तुझ से कुछ और त’अल्लुक़ भी ज़रूरी है मिरा,ये मोहब्बत तो किसी वक़्त भी मर सकती है| अज़हर फ़राग़

  • 17th Nov 2025

    मेरा यूट्यूब चैनल

    मैं अपने यूट्यूब चैनल पर नियमित रूप से कविताएं- जिनमें मेरी अपनी कविताओं के अलावा अत्यंत श्रेष्ठ कवियों- सोम ठाकुर जी, भारत भूषण जी, किशन सरोज जी आदि के गीत मुकेश जी, जगजीत सिंह जी, गुलाम अली जी, अनूप जलोटा जी आदि द्वारा गाई गई गीत और गज़लें आदि प्रस्तुत करता हूँ। मैं इन सबको…

  • 17th Nov 2025

    कोई भी शक्ल मिरे!

    कोई भी शक्ल मिरे दिल में उतर सकती है,इक रिफ़ाक़त में कहाँ उम्र गुज़र सकती है| अज़हर फ़राग़

  • 17th Nov 2025

    जब तक माथा चूम के!

    जब तक माथा चूम के रुख़्सत करने वाली ज़िंदा थी,दरवाज़े के बाहर तक भी मुँह में लुक़्मा होता था| अज़हर फ़राग़

  • 17th Nov 2025

    एक थैला, दो शिकन, हम तीन!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक श्रेष्ठ नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- एक थैला, दो शिकन, हम तीनडूबते सूरज तुझे आमीन! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद।

←Previous Page
1 … 248 249 250 251 252 … 1,525
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar