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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Jun 2025

    पत्थरों तक अगर!

    मूरतें कुछ निकाल ही लाया,पत्थरों तक अगर गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 17th Jun 2025

    किसको जीना था!

    किसको जीना था छूट कर तुझसे,फ़लसफ़ा काम कर गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 17th Jun 2025

    चाँद निकला कि!

    इतने खाए थे रात से धोखे,चाँद निकला कि डर गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 17th Jun 2025

    शाम आई तो!

    दिन किसी तरह कट गया लेकिन,शाम आई तो मर गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 17th Jun 2025

    कोयल!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री स्वर्गीया सुभद्रा कुमारी चौहान जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीया सुभद्रा कुमारी चौहान जी की यह कविता – देखो कोयल काली है परमीठी है इसकी बोलीइसने ही तो कूक कूक करआमों में मिश्री घोली…

  • 16th Jun 2025

    आम रस्ता नहीं था मैं!

    आम रस्ता नहीं था मैं, फिर भी,मुझसे हो कर गुज़र गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    एक रिमझिम में!

    एक रिमझिम में बस, घड़ी भर की,दूर तक तर-ब-तर गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    घर गया कोई!

    दिल में ऐसे उतर गया कोई,जैसे अपने ही घर गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    प्यास से मर रही !

    प्यास से मर रही है ये दुनिया,और पीने को, बस, रहा है ख़ून। सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    छतरियाँ तान लें !

    छतरियाँ तान लें जो पानी हो,आसमाँ से बरस रहा है ख़ून। सूर्यभानु गुप्त

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