Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 24th Aug 2025

    मेरा 75 वां जन्मदिन

    कल मेरा 75 वां जन्मदिन था, इस अवसर पर मेरी पत्नी के अलावा मेरे तीनों बेटे साथ थे, एक के साथ तो हम ग़ोवा में रहते ही हैं, मेरे एक बेटा बहू बंगलौर से आए और बड़ा बेटा लंदन से भी आया, जिनकी हमें पहले से जानकारी नहीं थी। मेरे बड़े बेटे ने एक और…

  • 23rd Aug 2025

    एक तो नैनाँ कजरारे!

    एक तो नैनाँ कजरारे और तिस पर डूबे काजल में,बिजली की बढ़ जाए चमक कुछ और भी गहरे बादल में| जाँ निसार अख़्तर

  • 23rd Aug 2025

    तुझ पे मरते हैं ज़िन्दगी!

    तुझ पे मरते हैं ज़िन्दगी अब भी,झूठ लिक्खें तो ये क़लम टूटे। सूर्यभानु गुप्त

  • 23rd Aug 2025

    सड़क के कुत्ते!

    ये जो शीर्षक दिया है मैंने वो अपने आप में एक गाली माना जाता है। पिछले दिनों बहुत जगह से ऐसी शिकायतें आई थीं कि आवारा कुत्तों ने किसी को काट लिया, जिनमें पर्यटक भी शामिल थे, कुछ मामलों में तो लोगों की मौत भी हो गई, जिसका कारण था कि कुत्तों के किसी झुंड…

  • 22nd Aug 2025

    टूटना तय था !

    एक अफ़वाह थी सभी रिश्ते,टूटना तय था और हम टूटे। सूर्यभानु गुप्त

  • 22nd Aug 2025

    कोई क़सम टूटे!

    बाँध टूटा नदी का कुछ ऐसे,जिस तरह से कोई क़सम टूटे। सूर्यभानु गुप्त

  • 22nd Aug 2025

    हम तो हर क़दम टूटे!

    शायरी, इश्क़, भूख, ख़ुद्दारी,उम्र भर हम तो हर क़दम टूटे। सूर्यभानु गुप्त

  • 22nd Aug 2025

    आईने, आईने रहे, गरचे!

    आईने, आईने रहे, गरचेसाफ़गोई में दम-ब-दम टूटे। सूर्यभानु गुप्त

  • 22nd Aug 2025

    कुर्सियों का नहीं!

    कुर्सियों का नहीं कोई मज़हब।,दैर ढह जाये या हरम टूटे। सूर्यभानु गुप्त

  • 22nd Aug 2025

    उसको सोचो तो!

    आई थी जिस हिसाब से आँधी,उस को सोचो तो पेड़ कम टूटे। सूर्यभानु गुप्त

←Previous Page
1 … 239 240 241 242 243 … 1,444
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,131 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar