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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Dec 2025

    रुत की कहानी देना!

    एक पौदा जो उगा है उसे पानी देना,अपने आँगन को नई रुत की कहानी देना| क़ैसर शमीम

  • 2nd Dec 2025

    सहरा सहरा गर्द हवा!

    आई है घने जंगल में अभी जो खेल भी चाहे खेले मगर,कल मेरे साथ उड़ाएगी फिर सहरा सहरा गर्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 2nd Dec 2025

    पत्तों की तरह बे-दर्द!

    छूटे न कभी फूलों का नगर कोशिश तो यही है अपनी मगर,इक रोज़ उड़ा ले जाएगी पत्तों की तरह बे-दर्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 2nd Dec 2025

    भाषा वंदना!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में श्री सोम ठाकुर जी का प्रसिद्ध गीत ‘भाषा वंदना’ प्रस्तुत कर रहा हूँ- ‘करते हैं तन-मन से वंदन जन, गण, मन की अभिलाषा का अभिनंदन अपनी संस्कृति का, आराधन अपनी भाषा का’ आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद ।

  • 2nd Dec 2025

    कहाँ की गर्द हवा!

    सब अपने शनासा छोड़ गए रस्ते में हमें ग़ैरों की तरह,चेहरे पे हमारे डाल गई ला कर ये कहाँ की गर्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 2nd Dec 2025

    जितना नूतन प्यार तुम्हारा!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री सुश्री स्नेहलता स्नेह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री स्नेहलता स्नेह जी का यह गीत- जितना नूतन प्यार तुम्हाराउतनी मेरी व्यथा पुरानीएक साथ कैसे निभ पायेसूना द्वार और अगवानी। तुमने जितनी संज्ञाओं सेमेरा नामकरण कर…

  • 1st Dec 2025

    मौसम तो बदलते हैं!

    मौसम तो बदलते हैं लेकिन क्या गर्म हवा क्या सर्द हवा,ऐ दोस्त हमारे आँगन में रहती है हमेशा ज़र्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 1st Dec 2025

    गिरह में बाँध लिया!

    हम ने गिरह में बाँध लिया,आधा चाँद और आधा दिन| नज़ीर क़ैसर

  • 1st Dec 2025

    उसने ख़त में भेजे हैं!

    उस ने ख़त में भेजे हैं,भीगी रात और भीगा दिन| नज़ीर क़ैसर

  • 1st Dec 2025

    हवा का झोंका दिन!

    मोम की बत्ती जैसी शाम,तेज़ हवा का झोंका दिन| नज़ीर क़ैसर

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