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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Jun 2025

    समुंदर ने आवाज़ दी!

    इक समुंदर ने आवाज़ दी,मुझ को पानी पिला दीजिए। राज़ इलाहाबादी

  • 18th Jun 2025

    कोई घर जला दीजिए!

    आप अँधेरे में कब तक रहें,फिर कोई घर जला दीजिए। राज़ इलाहाबादी

  • 18th Jun 2025

    क़ीमत-ए-दिल!

    क़ीमत-ए-दिल बता दीजिए,ख़ाक ले कर उड़ा दीजिए। राज़ इलाहाबादी

  • 18th Jun 2025

    तोहमत लगा दीजिए!

    मेरा दामन बहुत साफ़ है,कोई तोहमत लगा दीजिए। राज़ इलाहाबादी

  • 18th Jun 2025

    खेल ज्वाला से किया है!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री स्वर्गीया सुमित्रा कुमारी सिन्हा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीया सुमित्रा कुमारी सिन्हा जी की यह कविता – खेल ज्वाला से किया है! शून्यता जब नयन छाई, हृदय में तृष्णा समाई, समझ कर पीयूष…

  • 17th Jun 2025

    ज़ुल्फ़ें हटा दीजिए!

    चाँद कब तक गहन में रहे,अब तो ज़ुल्फ़ें हटा दीजिए। राज़ इलाहाबादी

  • 17th Jun 2025

    फिर मुस्कुरा दीजिए!

    लज़्ज़त-ए-ग़म बढ़ा दीजिए,आप फिर मुस्कुरा दीजिए। राज़ इलाहाबादी

  • 17th Jun 2025

    इश़्क भी क्या अजीब!

    इश़्क भी क्या अजीब दरिया है,मैं जो डूबा, उभर गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 17th Jun 2025

    मैं अमावस की रात!

    मैं अमावस की रात था, मुझमें,दीप ही दीप धर गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 17th Jun 2025

    पत्थरों तक अगर!

    मूरतें कुछ निकाल ही लाया,पत्थरों तक अगर गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

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