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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Jan 2026

    बोलियाँ रह जाएँगी!

    सिर्फ़ लफ़्ज़ों को नहीं अंदाज़ भी अच्छा रखो,इस जगत में सिर्फ़ मीठी बोलियाँ रह जाएँगी। आदर्श दुबे

  • 7th Jan 2026

    बेड़ियाँ रह जाएँगी!

    इस नए क़ानून का मंज़र यही दिखता है अबपाँव कट जाएँगे लेकिन बेड़ियाँ रह जाएँगी। आदर्श दुबे

  • 7th Jan 2026

    तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं , अपने स्वर में कैफी आज़मी साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ जिसे ‘अर्थ’ फिल्म के लिए जगजीत सिंह जी ने गाया था- तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या ग़म है जिसको छुपा रहे हो! आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *****

  • 7th Jan 2026

    अपना ग़म ले के कहीं

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं निदा फाज़ली साहब की लिखी एक ग़ज़ल अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे चंदन दास जी ने गाया था- अपना ग़म ले के कहीं और न जाया जाए, घर की बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाए। आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद । ******

  • 7th Jan 2026

    सिसकियाँ रह जाएँगी!

    काम करना हो जो कर लो आज की तारीख़ में,आँख नम हो जाएगी फिर सिसकियाँ रह जाएँगी। आदर्श दुबे

  • 7th Jan 2026

    अब की यह बरस!

    आज मैं हिंदी नवगीत विधा के अत्यंत श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रमेश रंजक जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। रंजक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत – अब की यह बरसबड़ा तरस-तरस बीतादीवारें नहीं पुतीं, रंग नहीं आएएक-एक…

  • 6th Jan 2026

    फूल सब ले जाएँगे!

    हम कहीं भी हों मगर ये छुट्टियाँ रह जाएँगी,फूल सब ले जाएँगे पर पत्तियाँ रह जाएँगी। आदर्श दुबे

  • 6th Jan 2026

    आप बचाते रहना!

    तुम भी ‘मुनीर’ अब उन गलियों से अपने आप को दूर ही रखना,अच्छा है झूटे लोगों से अपना-आप बचाते रहना| मुनीर नियाज़ी

  • 6th Jan 2026

    ख़ुश्बू की दीवार के !

    ख़ुश्बू की दीवार के पीछे कैसे कैसे रंग जमे हैं,जब तक दिन का सूरज आए उस का खोज लगाते रहना| मुनीर नियाज़ी

  • 6th Jan 2026

    नक़्श मिटाते रहना!

    रात के दश्त में फूल खिले हैं भूली-बिसरी यादों के,ग़म की तेज़ शराब से उन के तीखे नक़्श मिटाते रहना| मुनीर नियाज़ी

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