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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Feb 2026

    अब तो मज़हब कोई!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में नीरज जी की एक ग़ज़ल के दो शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ- अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए! आशा है आपको पसंद आएंगेधन्यवाद । *****

  • 18th Feb 2026

    तिरे गेसुओं की शबनम!

    तिरी दीद से सिवा है तिरे शौक़ में बहाराँ,वो चमन जहाँ गिरी है तिरे गेसुओं की शबनम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 18th Feb 2026

    जय जय गिरिवर राजकिशोरी!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा सीता स्वयंवर से पहले सीता जी ने गौरी की पूजा की थी, उस प्रसंग को अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- जय जय गिरिवर राजकिशोरी, जय महेश मुख चंद्र चकोरी! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 18th Feb 2026

    आ के देख हमदम!

    दिल ओ जाँ फ़िदा-ए-राहे कभी आ के देख हमदम,सर-ए-कू-ए-दिल-फ़िगाराँ शब-ए-आरज़ू का आलम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 18th Feb 2026

    गीतों का बादल!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। अवस्थी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का यह गीत– मैं गीत बरसाने वाला बादल हूँ ।प्यासे नयनों में हँसता काजल हूँ ।…

  • 17th Feb 2026

    ये जफ़ा-ए-ग़म का

    ये जफ़ा-ए-ग़म का चारा वो नजात-ए-दिल का आलम, तिरा हुस्न दस्त-ए-ईसा तिरी याद रू-ए-मर्यम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 17th Feb 2026

    पूछा किसी ने हाल!

    ऐसा लगा ग़रीबी की रेखा से हूँ बुलंद, पूछा किसी ने हाल कुछ ऐसी अदा के साथ| कैफ़ी आज़मी

  • 17th Feb 2026

    आवाज़-ए-पा के साथ

    इक्कीसवीं सदी की तरफ़ हम चले तो हैं, फ़ित्ने भी जाग उट्ठे हैं आवाज़-ए-पा के साथ| कैफ़ी आज़मी

  • 17th Feb 2026

    होने लगी है जिस्म में!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में दुष्यंत कुमार जी की एक प्रसिद्ध ग़ज़ल के दो शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ (युट्यूब शॉर्ट में केवल 1 मिनट तक का ही वीडिओ शेयर किया जा सकता है)- होने लगी है जिस्म में जुम्बिश तो देखिए! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद ।…

  • 17th Feb 2026

    ऐ काश तुम भी!

    रक़्स-ए-सबा के जश्न में हम तुम भी नाचते,ऐ काश तुम भी आ गए होते सबा के साथ| कैफ़ी आज़मी

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