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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Jul 2025

    दर्द का दरबार है!

    जेबों में नहीं, सिर्फ़ गरेबान में झाँको,यह दर्द का दरबार है बाज़ार नहीं है। शेरजंग गर्ग

  • 15th Jul 2025

    पाँव में रफ्तार नहीं है!

    मत पूछिए क्यों पाँव में रफ्तार नहीं है।यह कारवाँ मज़िल का तलबग़ार नहीं है॥ शेरजंग गर्ग

  • 15th Jul 2025

    वर्ना रो पड़ोगे!

    एक बार फिर से आज मैं, मेरे लिए गुरुतुल्य रहे वरिष्ठ हिंदी गीत कवि स्वर्गीय  डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। बेचैन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी का यह नवगीत– बंद होंठों में छुपा लोये हँसी के…

  • 14th Jul 2025

    दोस्तों की दाद तो!

    दोस्तों की दाद तो मिलती ही रहती है सदाआज दुश्मन ने कहा–शाबाश तो अच्छा लगा। राम दरश मिश्र

  • 14th Jul 2025

    चाँदनी का हास!

    आ गया हूँ बाद मुद्दत के शहर से गाँव में,आज देखा चाँदनी का हास तो अच्छा लगा। राम दरश मिश्र

  • 14th Jul 2025

    सुबह आयेगी ज़रूर!

    रात कितनी भी घनी हो सुबह आयेगी ज़रूर,लौट आया आपका विश्वास तो अच्छा लगा। राम दरश मिश्र

  • 14th Jul 2025

    इंसान तो इंसान है!

    है नहीं कुछ और बस इंसान तो इंसान है,है जगा यह आपमें अहसास तो अच्छा लगा। राम दरश मिश्र

  • 14th Jul 2025

    आँसुओं से नम मिली!

    ख़ून से लथपथ हवाएँ ख़ौफ-सी उड़ती रहीं,आँसुओं से नम मिली वातास तो अच्छा लगा। राम दरश मिश्र

  • 14th Jul 2025

    क़त्ल, चोरी, रहज़नी!

    क़त्ल, चोरी, रहज़नी व्यभिचार से दिन थे मुखर,चुप रहा कुछ आज का दिन ख़ास तो अच्छा लगा। राम दरश मिश्र

  • 14th Jul 2025

    लोग यों तो रोज़ ही!

    लोग यों तो रोज़ ही आते रहे, आते रहे,आज लेकिन आप आये पास तो अच्छा लगा। राम दरश मिश्र

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