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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Sep 2025

    हम मन की परतें खोलेंगे।

    आज प्रस्तुत है मेरी एक नई रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- हम मन की परतें खोलेंगे। हर तह में कुछ भाव भरे हैंव्यतिक्रम औ ठहराव भरे हैंरुक रुककर बढ़ने के क्रम मेंआए वे भटकाव भरे हैं, सच की कसम निभाएंगे हममन बोला सो हम बोलेंगे। बर्फ ज्ञान की भले न पिघलेविद्वद्जन कतराकर निकलें,हम खुलकर…

  • 24th Sep 2025

    जुनूँ के वास्ते सहरा!

    हर एक सम्त यहाँ वहशतों का मस्कन है,जुनूँ के वास्ते सहरा ओ आशियाना क्या। अज़हर इक़बाल

  • 24th Sep 2025

    सदाएँ दे के यहाँ पर!

    खड़े हुए हो मियाँ गुम्बदों के साए में, सदाएँ दे के यहाँ पर फ़रेब खाना क्या। अज़हर इक़बाल

  • 24th Sep 2025

    खुला हुआ है कहीं!

    बसीत होने लगी शहर-ए-जाँ पे तारीकी,खुला हुआ है कहीं पर शराब-ख़ाना क्या। अज़हर इक़बाल

  • 24th Sep 2025

    यू ट्यूब पर मेरा गीत- एकलव्य हम

    यू ट्यूब पर मेरा एक और गीत आज प्रस्तुत है, कृपया सुनकर अपनी सम्मति दें।आप यहाँ दिए गए लिंक पर मेरे चैनल को सब्स्क्राइब करेंगे तो और अच्छ लगेगा।धन्यवाद Link to my channel- youtube.com/@samaysakshi

  • 24th Sep 2025

    तुम्हारी याद के!

    तुम्हारी याद के दीपक भी अब जलाना क्या,जुदा हुए हैं तो अहद-ए-वफ़ा निभाना क्या। अज़हर इक़बाल

  • 24th Sep 2025

    क्या कुछ न हुआ ग़म से!

    क्या कुछ न हुआ ग़म से क्या कुछ न किया ग़म ने,और यूँ तो हुआ जो कुछ बे-कार नज़र आया| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 24th Sep 2025

    मेरा यू ट्यूब चैनल

    मैं इन दिनों यू ट्यूब पर अपने चैनल में अपने गीतों-कविताओं का पाठ अपने स्वर में रिकॉर्ड करके डाल रहा हूँ।भविष्य में अन्य अपने प्रिय कवियों की रचनाएं और हाँ कुछ फिल्मी गीत भी, विशेष रूप से मेरे प्रिय गायक मुकेश जी के गाए हुए डालूंगा। सभी मित्रों से अनुरोध है कि मेरे यू ट्यूब…

  • 24th Sep 2025

    मख़मूर नज़र आया!

    ज़र्रा हो कि क़तरा हो ख़ुम-ख़ाना-ए-हस्ती में,मख़मूर नज़र आया सरशार नज़र आया| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 24th Sep 2025

    होता जाता दूर निवाला!

    अपनी एक नई रचना आज शेयर कर रहा हूँ, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कम होती जाती हैं खुशियांहोता जाता दूर निवालादोष तराजू में भी है कुछकुछ है कुटिल तौलने वाला। सभी साज़-सामान यहाँ हैंगीता और क़ुरान यहाँ हैंपर जिसको मानव कह पाएंआखिर वो इंसान कहाँ है, पोथी में उपदेश भरे हैंझूठा उन्हें बोलने वाला।…

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