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थी ग़ज़ल मेरी बहुत!
थी ग़ज़ल मेरी बहुत बे-रब्त बे-कैफ़-ओ-असर,वो मिरे अशआ’र को अलफ़ाज़-ओ-मा’नी दे गया| नज़र कानपुरी
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बात भी इतनी कि!
बात भी इतनी कि बस उस ने किया मुझ को सलाम,हाँ मगर लोगों के दिल में बद-गुमानी दे गया| नज़र कानपुरी
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वो रवानी दे गया!
सर मिरे सीने पे उस ने जब रखा है ज़िंदगी,इस तरह दरिया-ए-दिल को वो रवानी दे गया| नज़र कानपुरी
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जाते जाते वो मुझे!
जाते जाते वो मुझे अपनी निशानी दे गया,ज़िंदगी-भर के लिए आँखों में पानी दे गया| नज़र कानपुरी
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गीत लिखो !
आज हल्के-फुल्के मूड की अपनी एक नई रचना, छोटी बहर की ग़ज़ल, शेयर कर रहा हूँ- देखो तोता-मैना गीत लिखो, तुमसे बोला है ना, गीत लिखो। कुछ अपनी दुकान जम जाए बस, देंगे चना-चबैना, गीत लिखो। मुक्त हवा करताल बजाएगी,काम करो तुम अपना, गीत लिखो। खुशी, उदासी, बेचैनी, संभ्रमआएंगे-जाएंगे गीत लिखो। भाव, अभाव, प्रभाव बदलते…
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ये पसीना वही आँसू हैं!
ये पसीना वही आँसू हैं जो पी जाते थे हम,‘आरज़ू’ लो वो खुला भेद वो टूटा पानी| आरज़ू लखनवी
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ये हवा करती है!
न सता उस को जो चुप रह के भरे ठंडी साँस,ये हवा करती है पत्थर का कलेजा पानी| आरज़ू लखनवी