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एक पत्ता गलत उठाया था!
आज प्रस्तुत है एक और गीतआप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- आज तक ये मलाल कायम है,एक पत्ता गलत उठाया था। कब समझ साथ सदा देती हैलोभ भी काम किया करता है,आदमी बुद्धिमान कितना हो,भूल तो सुबह-शाम करता है देर तक सालती हैं वे भूलेंखुद को जिनसे न रोक पाया था। जिस तरह बीज फला करते…
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तो धज्जियाँ उड़ जाएँ!
बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर,जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी