-
जिस गली में तेरा घर न हो बालमा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म- ‘कटी पतंग’ के लिए मुकेश जी का गाया गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा था और राहुल देव बर्मन जी ने इसका संगीत तैयार किया था- जिस गली में तेरा घर न हो बालमा, उस गली से हमें…
-
एक पुराना दुख- पुरानी पोस्ट
अपनी एक बहुत पुरानी पोस्ट फिर से प्रस्तुत कर रहा हूँ। इस शहर में वो कोई बारात हो या वारदात अब किसी भी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियां । (दुष्यंत कुमार)लेकिन ये ब्लॉग लिखने का उद्देश्य तो खिड़कियों को खोलने का प्रयास करना ही है। एक पुराना अनुभव साझा कर रहा हूँ, उससे पहले…
-
हमें उल्फ़त भी थी!
क्या क़यामत है ‘मुनीर’ अब याद भी आते नहीं,वो पुराने आश्ना जिन से हमें उल्फ़त भी थी| मुनीर नियाज़ी
-
अजनबी शहरों में रहते!
अजनबी शहरों में रहते उम्र सारी कट गई,गो ज़रा से फ़ासले पर घर की हर राहत भी थी| मुनीर नियाज़ी
-
कह गया मैं सामने उसके!
कह गया मैं सामने उस के जो दिल का मुद्दआ’,कुछ तो मौसम भी अजब था कुछ मिरी हिम्मत भी थी| मुनीर नियाज़ी
-
इन्हें प्रणाम करो ये -2
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की प्रसिद्ध व्यंग्य कविता का दूसरा भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ- इन्हें प्रणाम करो ये बड़े महान हैं-2 आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
-
जो हवा में घर बनाए!
जो हवा में घर बनाए काश कोई देखता,दश्त में रहते थे पर ता’मीर की आदत भी थी| मुनीर नियाज़ी
-
फूल थे बादल भी था !
फूल थे बादल भी था और वो हसीं सूरत भी थी,दिल में लेकिन और ही इक शक्ल की हसरत भी थी| मुनीर नियाज़ी
-
दीवाना मुझसा नहीं!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- तीसरी मंज़िल के लिए मोहम्मद रफी जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हुन जिसे मजरूह सुल्तानपुरी जी ने लिखा था और राहुल देव बर्मन जी ने इसका संगीत दिया थ, यह गीत शम्मी कपूर जी पर फिल्माया गया था- दीवाना मुझसा नहीं,…