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त्राहि, त्राहि कर उठता जीवन!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत– त्राहि त्राहि कर उठता जीवन! जब रजनी के सूने क्षण में,तन-मन के एकाकीपन…
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आग का दरिया देखूँ!
टूट जाएँ कि पिघल जाएँ मिरे कच्चे घड़े,तुझ को मैं देखूँ कि ये आग का दरिया देखूँ| परवीन शाकिर
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और भी तुझ सा देखूँ!
तू मिरी तरह से यकता है मगर मेरे हबीब,जी में आता है कोई और भी तुझ सा देखूँ| परवीन शाकिर
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आँखों में उतरता देखूँ!
मैं ने जिस लम्हे को पूजा है उसे बस इक बार,ख़्वाब बन कर तिरी आँखों में उतरता देखूँ| परवीन शाकिर
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हमने तुझको प्यार किया है जितना!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मुकेश जी का गाया फिल्म- दूल्हा-दुल्हन का यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- हमने तुझको प्यार किया है जितना, कौन करेगा इतना! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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फूल की तरह मिरे!
फूल की तरह मिरे जिस्म का हर लब खुल जाए,पंखुड़ी पंखुड़ी उन होंटों का साया देखूँ| परवीन शाकिर
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सौ-सौ प्रतीक्षित पल गए!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। शेर जंग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी का यह नवगीत– सौ-सौ प्रतीक्षित पल गएसारे भरोसे छल गएकिरणें हमारे गाँव मेंख़ुशियाँ नहीं लाईं । महका नहीं…
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रुत में महकता देखूँ!
मुझ पे छा जाए वो बरसात की ख़ुश्बू की तरह,अंग अंग अपना इसी रुत में महकता देखूँ| परवीन शाकिर
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एक बच्चे की तरह!
सब ज़िदें उस की मैं पूरी करूँ हर बात सुनूँ,एक बच्चे की तरह से उसे हँसता देखूँ| परवीन शाकिर