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हम मन की परतें खोलेंगे।
आज प्रस्तुत है मेरी एक नई रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- हम मन की परतें खोलेंगे। हर तह में कुछ भाव भरे हैंव्यतिक्रम औ ठहराव भरे हैंरुक रुककर बढ़ने के क्रम मेंआए वे भटकाव भरे हैं, सच की कसम निभाएंगे हममन बोला सो हम बोलेंगे। बर्फ ज्ञान की भले न पिघलेविद्वद्जन कतराकर निकलें,हम खुलकर…
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जुनूँ के वास्ते सहरा!
हर एक सम्त यहाँ वहशतों का मस्कन है,जुनूँ के वास्ते सहरा ओ आशियाना क्या। अज़हर इक़बाल
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यू ट्यूब पर मेरा गीत- एकलव्य हम
यू ट्यूब पर मेरा एक और गीत आज प्रस्तुत है, कृपया सुनकर अपनी सम्मति दें।आप यहाँ दिए गए लिंक पर मेरे चैनल को सब्स्क्राइब करेंगे तो और अच्छ लगेगा।धन्यवाद Link to my channel- youtube.com/@samaysakshi
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तुम्हारी याद के!
तुम्हारी याद के दीपक भी अब जलाना क्या,जुदा हुए हैं तो अहद-ए-वफ़ा निभाना क्या। अज़हर इक़बाल
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क्या कुछ न हुआ ग़म से!
क्या कुछ न हुआ ग़म से क्या कुछ न किया ग़म ने,और यूँ तो हुआ जो कुछ बे-कार नज़र आया| फ़िराक़ गोरखपुरी
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मेरा यू ट्यूब चैनल
मैं इन दिनों यू ट्यूब पर अपने चैनल में अपने गीतों-कविताओं का पाठ अपने स्वर में रिकॉर्ड करके डाल रहा हूँ।भविष्य में अन्य अपने प्रिय कवियों की रचनाएं और हाँ कुछ फिल्मी गीत भी, विशेष रूप से मेरे प्रिय गायक मुकेश जी के गाए हुए डालूंगा। सभी मित्रों से अनुरोध है कि मेरे यू ट्यूब…
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मख़मूर नज़र आया!
ज़र्रा हो कि क़तरा हो ख़ुम-ख़ाना-ए-हस्ती में,मख़मूर नज़र आया सरशार नज़र आया| फ़िराक़ गोरखपुरी