Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 14th Mar 2019

    सो गई हैं सारी मंज़िलें, सो गया है रस्ता!

    आज मुझे अपने प्रिय गायक मुकेश जी के गाये, प्रेम के और नायिका सौंदर्य वर्णन के कई सुंदर गीत एक साथ याद आ रहे हैं। यह निर्णय नहीं कर पा रहा कि कौन सा गीत शेयर करूं! तो फिलहाल ऐसा करता हूँ, उनके सुपुत्र नितिन मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत शेयर कर…

  • 13th Mar 2019

    मैंने समुद्र में अपना जाल फेंका  

    आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि  गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 12th Mar 2019

    फटी हुई जेबों में करुणा!

    आज सुबह की घटना के बहाने बात करना चाहूंगा। सुबह के समय मैं अपनी सोसायटी के पीछे बने स्टोर से दैनिक सामान खरीदने जाता हूँ। जो वस्तुएं मैं सामान्यतः खरीदता हूँ उनमें दूध के पैकेट और फल के नाम पर कुछ केले मैं खरीदता हूँ, बाकी सब सामान के लिए घर में और लोग भी…

  • 11th Mar 2019

    गीतों के दाम की तरह!

    लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज असहिष्णुता के बारे में बात करने की इच्छा है। ये असहिष्णुता, उस असहिष्णुता की अवधारणा से कुछ अलग है, जिसको लेकर राजनैतिक दल चुनाव से पहले झण्डा उठाते रहे हैं, और अवार्ड वापसी जैसे उपक्रम होते रहे हैं। मुझे इसमें कतई कोई संदेह नहीं है कि समय…

  • 9th Mar 2019

    शीर्षक रहित!

     

  • 8th Mar 2019

    जो मिलता है, उसका दामन भीगा लगता है!

    आज क़ैसर उल जाफरी जी की लिखी एक गज़ल याद आ रही है, जिसके कुछ शेर पंकज उधास जी ने बड़ी खूबसूरती से गाए हैं। वास्तव में उदासी की, अभावों की और प्यार के अभाव की और लगभग दीवानगी की स्थिति को इस गज़ल के शेरों में बहुत प्रभावी अभिव्यक्ति दी गई है-   दीवारों…

  • 7th Mar 2019

    ये तो कहो कौन हो तुम, कौन हो तुम!

    आज फिर से मुझे अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है। जनकवि शैलेंद्र जी का लिखा यह गीत, 1962 में बनी फिल्म- आशिक़ के लिए मुकेश जी ने शंकर जयकिशन जी के संगीत निर्देशन में गाया था। इस फिल्म में राजकपूर एक सड़क छाप नायक बने हैं, जो संभ्रांत…

  • 6th Mar 2019

    अडिग- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 5th Mar 2019

    Our Great India- These Cheap Politicians!

    Again it is my submission based on a weekly prompt, yes I am a bit late in submitting it, this time. The subject is ‘how we can stop terror attacks?’ I am sorry to say that there is not much which a common man can do to stop terror attacks. But yes, everybody needs to…

  • 4th Mar 2019

    44. रोशनी के साथ हंसिए बोलिये!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज गुड़गांव से, गोवा की तरफ रवानगी का ज़िक्र और फिर से कुछ पुरानी यादें ताज़ा करने का अवसर है। संक्रमण काल है, सामान जा चुका, अब अपने जाने की बारी है। ऐसे में भी मौका मिलने पर बात तो की जा सकती है। समय है…

←Previous Page
1 … 1,468 1,469 1,470 1,471 1,472 … 1,524
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
Loading Comments...
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar