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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Sep 2025

    छत करो मुझे!

    कुछ भी हो मुझ को एक नई शक्ल चाहिए, दीवार पर बिछाओ मुझे छत करो मुझे| मुनव्वर राना

  • 30th Sep 2025

    पानी ने कब कहा था!

    मैं ने तो तुम से की ही नहीं कोई आरज़ू,पानी ने कब कहा था कि शर्बत करो मुझे| मुनव्वर राना

  • 30th Sep 2025

    चलो कि धूप दरीचों में

    उठो कि ओस की बूँदें जगा रही हैं तुम्हें,चलो कि धूप दरीचों में आ के बैठ गई| मुनव्वर राना

  • 29th Sep 2025

    आउट ऑफ स्टेशन!

    फिलहाल आगरा में हूँ और इंटरनेट कनेक्शन की भी समस्या है, अतः कुछ दिन पोस्ट डालने में दिक्कत हो सकती है।कोशिश करूंगा कि जब भी संभव हो संपर्क में रहूं!

  • 29th Sep 2025

    चलते-चलते!

    #ChalteChalte

  • 28th Sep 2025

    जब तक है दिलों में !

    जब तक है दिलों में सच्चाई सब नाज़-ओ-नियाज़ वहीं तक हैं,जब ख़ुद-ग़र्ज़ी आ जाती है जुल होते हैं घातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 28th Sep 2025

    पैमान-ए-वफ़ा भी !

    जो कुछ भी ख़ुशी से होता है ये दिल का बोझ न बन जाए,पैमान-ए-वफ़ा भी रहने दो सब झूटी बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 28th Sep 2025

    हँसने में जो आँसू !

    हँसने में जो आँसू आते हैं नैरंग-ए-जहाँ बतलाते हैं,हर रोज़ जनाज़े जाते हैं हर रोज़ बरातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 28th Sep 2025

    मेरा एक और गीत- मौसम का वायलिन

    आज मैं अपना एक और नवगीत, शेयर कर रहा हूँ- हमने कब मौसम का वायलिन बजाया है। मुझे आपकी सम्मति की प्रतीक्षा रहेगी- आप मेरे यू ट्यूब चैनल को भी सब्स्क्राइब करेंगे तो अच्छा लगेगा, लिंक यहाँ दिया गया है- https://www.youtube.com/@kris230450 आज के लिए इतना ही नमस्कार

  • 28th Sep 2025

    पहरों बातें होती हैं!

    जो कान लगा कर सुनते हैं क्या जानें रुमूज़ मोहब्बत के,अब होंट नहीं हिलने पाते और पहरों बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

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