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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Aug 2020

    जो अपने खून को पानी बना नहीं सकते!

    आज साहिर लुधियानवी साहब की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| साहिर जी फिल्मी दुनिया के एक ऐसे गीतकार थे जिनका नाम अदब की दुनिया में भी बड़ी इज्जत के साथ लिया जाता था| वे मुशायरों की शान हुआ कराते थे और बड़े स्वाभिमानी भी थे, उन्होंने ही फिल्म और संगीत वालों के सामने यह…

  • 26th Aug 2020

    मृत्यु- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि  गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 25th Aug 2020

    यही आग़ाज़ था मेरा, यही अंजाम होना था!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की बारी है – आज गुलाम अली जी का गाया हुआ एक गीत याद आ रहा है, जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा है और इसका संगीत अनु मलिक जी ने तैयार किया है। यह गीत वैसे ही सुंदर लिखा गया है और गुलाम अली जी की गायकी…

  • 24th Aug 2020

    My travel destination after defeat of COVID-19

    We have been facing the conditions of the spread of this dreaded Pandemic called COVD-19 in India for almost 5 months now. It is one of the important topics we often discuss, we sometimes feel somewhat satisfied that its impact has been lesser in India compared to so many countries, considering the population of our…

  • 23rd Aug 2020

    यही होता है तो आखिर यही होता क्यों हैं!

    कैफी आज़मी साहब की एक गजल आज याद आ रही है| कैफी साहब हिंदुस्तान के एक प्रसिद्ध शायर रहे हैं और बहुत सी सुंदर रचनाएँ उन्होंने हमें दी हैं, फिल्मों में भी उनकी बहुत सी रचनाओं का इस्तेमाल किया गया और आज जो गज़ल मैं शेयर कर रहा हूँ उसको जगजीत सिंह साहब ने गाया…

  • 22nd Aug 2020

    तेरा मेला पीछे छूटा, राही चल अकेला!

    फिल्म-संबंध, जो 1969 में रिलीज़ हुई थी, उसका एक गीत आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| यह गीत राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत कविताएं लिखते थे, जैसे ‘आओ बच्चे तुम्हें दिखाएँ झांकी हिंदुस्तान की’ आदि-आदि| आज के इस गीत के लिए संगीत दिया है ओ पी नैयर जी का और इसे गाया है मेरे प्रिय गायक- मुकेश…

  • 21st Aug 2020

    स्वरों के खिलाड़ी-बंदिश बैंडिट्स!

    आज मैं एमेजॉन प्राइम वीडियोज़ पर इन दिनों प्रदर्शित की जा रही वेब सीरीज़- ‘बंदिश बेंडिट्स’ को देखने के अपने अनुभव शेयर कर रहा हूँ| मुझमें इतना आत्मविश्वास या कहें कि अहंकार नहीं है कि मैं एक समीक्षक के रूप में खुद को प्रस्तुत करूं और आपको बताऊँ कि इसको देखना चाहिए या नहीं| बस…

  • 20th Aug 2020

    इतना सा मैं- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 19th Aug 2020

    लो,एक बजा दोपहर हुई!

    हिन्दी मंचों पर गीतों के दिव्य हस्ताक्षर स्वर्गीय भारत भूषण जी, जो मेरठ, उत्तर प्रदेश से थे और उनके अनेक गीत मैं हमेशा गुनगुनाता रहा हूं, जैसे – चक्की पर गेहूं लिए खड़ा, मैं सोच रहा उखड़ा-उखाड़ा, क्यों दो पाटों वाली चाकी, बाबा कबीर को रुला गई’, मैं बनफूल, भला मेरा- कैसा खिलना, क्या मुरझाना’…

  • 18th Aug 2020

    फिर सुशांत की बात!

    आज एक बार फिर से सुशांत सिंह राजपूत के बारे में बात करने का मन हो रहा है| सुशांत की मौत को दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका है और समय बीतने के साथ यह तो स्पष्ट होता जा रहा है कि सुशांत जी ने आत्महत्या तो नहीं ही की है| कौन लोग थे…

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