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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Sep 2020

    सुदूर काल – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 15th Sep 2020

    पेंशन की टेंशन -2

    मैं सामान्यतः अपने ब्लॉग का प्रयोग इस तरह की पोस्ट लिखने के लिए नहीं करता, लेकिन शायद पहले भी मैंने एक बार ऐसा आलेख लिखा है, आज फिर से इस विषय पर लिख रहा हूँ| हाँ तो ये पोस्ट है पेंशन के बारे में! मैं बता दूँ कि मैं एक सार्वजनिक उद्यम में काम करता…

  • 14th Sep 2020

    अब कहाँ हैं चाणक्य!

    शीर्षक पढ़कर आप पता नहीं क्या सोचेंगे! यह भी संभव कि इसको आप आज के किसी राजनैतिक व्यक्तित्व से भी जोड़कर देखने लगें| चाणक्य तो बहुत पहले हुए थे, मौर्यवंश के जमाने में, जिन्होंने सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य को गद्दी पर बैठाया, उसके बाद बिन्दुसार हुए और चाणक्य की पारखी निगाहों ने अशोक को भविष्य में…

  • 13th Sep 2020

    मेरा ये देश तो रोटी की ही ख़बर में रहा !

    एक बार फिर से मैं, हिन्दी काव्य मंचों और फिल्मी दुनिया, दोनों क्षेत्रों में अपनी रचनाधर्मिता की अमिट छाप छोड़ने वाले स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी की एक हिन्दी गजल, जिसे वे ‘गीतिका’ कहते थे प्रस्तुत कर रहा हूँ| नीरज जी जहां कवि सम्मेलनों में बहुत लोकप्रिय थे, वहीं उन्होंने हमारी फिल्मों में भी अनेक…

  • 12th Sep 2020

    अश्रु बहाने से न कभी पाषाण पिघलता है !

    हिन्दी काव्य मंचों के प्रमुख एवं लोकप्रिय कवियों की रचनाएँ प्रस्तुत करने के क्रम में आज मैं स्वर्गीय शिशुपाल सिंह जी ‘निर्धन’ की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| एक संकल्प इस कविता में है कि आज हमारे जीवन में कितना ही अंधकार क्यों न हो, हम अपने लक्ष्य अवश्य प्राप्त करेंगे| बड़ा ही ओजपूर्ण…

  • 11th Sep 2020

    ये हुआ पेपर लीक!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की बारी है – दिल्ली में सीबीएसई के कुछ पेपर लीक होने की घटना बहुत खेदजनक है और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। यह प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है। वर्तमान व्यवस्था के रहते इसमें सुधार की संभावना नजर नहीं आ रही है। आइए विचार करें कि…

  • 10th Sep 2020

    शुभाशीष- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 9th Sep 2020

    संबंध कुछ उनका नहीं है, सूर्य के परिवार से!

    हिन्दी काव्य मंचों के प्रमुख एवं लोकप्रिय कवियों की रचनाएँ प्रस्तुत करने के क्रम में आज मैं श्री बालकवि बैरागी जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| बैरागी जी स्वाभिमान से भरी, एवं ओजपूर्ण कविताएं लिखने के लिए विख्यात हैं| बैरागी जी मध्यप्रदेश के अति सामान्य समुदाय से उभरकर आए हैं और अपनी कविताओं…

  • 8th Sep 2020

    मेरी थकन उतर जाती है!

    हिन्दी काव्य मंचों के प्रमुख एवं लोकप्रिय कवियों की रचनाएँ प्रस्तुत करने के क्रम में आज मैं स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| रामावतार त्यागी जी स्वाभिमान से भरी, एवं ओजपूर्ण कविताएं लिखने के लिए विख्यात थे| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का यह गीत- – हारे थके…

  • 7th Sep 2020

    यह तुम्हारे नैन में तिरता हुआ जल!

    एक बार फिर मैं आज बहुत ही प्यारे और भावुक गीतकार, स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मुझे यह स्मरण करके अच्छा लगता है कि मुझे कई बार उनसे गले मिलने का अवसर मिला था| बहुत ही सरल हृदय व्यक्ति, सृजनशील रचनाकार थे| आज के इस गीत में भी उन्होंने…

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