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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Sep 2020

    कौन है यह – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 25th Sep 2020

    चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ!

    हिन्दी काव्य मंचों के एक अत्यंत लोकप्रिय कवि रहे स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का एक प्रसिद्ध गीत आज शेयर कर रहा हूँ, जिसमें कवि ऐसे भाव व्यक्त करता है कि अपने महान राष्ट्र के लिए सब कुछ समर्पित करने के बाद भी हम उसका ऋण नहीं उतार सकते| लीजिए प्रस्तुत है राष्ट्रप्रेम की भावना से…

  • 24th Sep 2020

    पुष्प – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 23rd Sep 2020

    सेवा की दरकार, सेवा का कारोबार!

    कुछ दिन पहले मैंने सरकारी पेंशन की परेशानियों को लेकर एक ब्लॉग पोस्ट लिखी| उस पोस्ट का उद्देश्य मात्र इतना बताना था कि हमारा सिस्टम कितना क्रूर है, वह किसी भी परेशानी की स्थिति को समस्याएँ और बढ़ाने के लिए प्रयोग में ला सकता है, उनके पास किसी समस्या का हल कभी नहीं होता! मेरी…

  • 22nd Sep 2020

    क्षण भर को क्यों प्यार किया था?

    आज मैं स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, आज की पीढ़ी उनको अमिताभ बच्चन के पिता के रूप में अधिक जानती है, परंतु किसी ज़माने वे हिन्दी कवि सम्मेलनों के अत्यंत लोकप्रिय कवि हुआ करते थे| उनकी ‘मधुशाला’ ने तो लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे, लोग इसको सुनकर…

  • 21st Sep 2020

    Living with a purpose!

    There is so much life happening around us, not only humans but animals, insects, plants. In a way every living being has a purpose in life. Only thing is that all other species have a purpose defined by nature. Humans are the thinking, dreaming and planning creatures. They can dream and define their goals according…

  • 20th Sep 2020

    नन्हीं कलाइयों की गुलाबी चूड़ियाँ!

    एक बार फिर मैं जनकवि नागार्जुन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय नागार्जुन जी विद्रोह और क्रान्ति की कविताओं के लिए जाने जाते थे, परंतु यह अलग तरह की कविता है, जिसमें एक रौबीले दिखने वाले बस चालक की ममता, अपनी पुत्री के प्रति उसके प्रेम को प्रतिबिंबित किया गया है, बस…

  • 19th Sep 2020

    जिसको भी पास से देखोगे अकेला होगा!

    आज मैं एक बार फिर से अपने प्रिय शायरों में से एक रहे, स्वर्गीय निदा फाज़ली साहब की एक गज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ| निदा साहब अपनी काव्य शैली के अनूठेपन के लिए विख्यात थे, उसके अनेक शेर बरबस होठों पर आ जाते हैं, जैसे – ‘दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है, मिल…

  • 18th Sep 2020

    और जीने के लिए हैं दिन बहुत सारे!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की बारी है – आज सोचा कि ज़िंदगी के बारे में बात करके, ज़िंदगी को उपकृत कर दें।शुरू में डॉ. कुंवर बेचैन जी की पंक्तियां याद आ रही हैं, डॉ. बेचैन मेरे लिए गुरू तुल्य रहे हैं और उनकी गीत पंक्तियां अक्सर याद आ जाती हैं- ज़िंदगी का…

  • 17th Sep 2020

    Poetry, writing,Blogging!

    Today once again I am discussing a subject, which I might have discussed a few times earlier also. Yes, it’s regarding the writing and then blogging activity. Basically it is regarding expressing myself, be it through writing or speaking in any medium. I remember listening to some orator who told that a person who has…

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