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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Oct 2020

    आश्वासन का जर्दा, भाषण की सुपाड़ियाँ!

    हिन्दी काव्य मंचों के प्रसिद्ध हास्य कवि स्वर्गीय ओमप्रकाश आदित्य जी एक अत्यंत सृजनशील रचनाकार थे, छंद पर उनका पूर्ण अधिकार था और उनकी हास्य कविताओं को बहुत आनंद और आदर के साथ सुना जाता था| मेरा सौभाग्य है कि अनेक बार कवि सम्मेलनों के आयोजन के कारण उनसे भेंट का अवसर मिला था| आज…

  • 15th Oct 2020

    तू खुशी से मेरी जल गया!

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट-आज एक पुराना गीत याद आ रहा है, जिसे मुझे मेरे एक पुराने मित्र और सहकर्मी- श्री चुन्नी लाल जी गाया करते थे। ये गीत बहुत पुरानी फिल्म- दिल-ए-नादां का है, जिसे शकील बदायुनी जी ने लिखा है और गुलाम…

  • 14th Oct 2020

    नीम का पौधा हूँ, आँगन में लगा लो मुझको

    प्रसिद्ध शायर और फिल्मी गीतकार नक़्श लायलपुरी जी की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| फिल्मों में उन्होंने बहुत प्यारे गीत लिखे हैं, जैसे- ‘मैं तो हर मोड़ पर तुझको दूंगा सदा’, ‘ये मुलाक़ात इक बहाना है’, ‘उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ’ आदि-आदि| लीजिए आज प्रस्तुत है नक़्श लायलपुरी जी की…

  • 13th Oct 2020

    मानहानि – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 12th Oct 2020

    बूंद बन-बन टूट जाऊँगा वहां

    हिन्दी के गीत- कविता संसार के एक और अनमोल रत्न स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी को आज याद कर रहा हूँ| पहले भी इनके कुछ गीत मैंने शेयर किए है| भावुकता का अजीब संसार होता है इन लोगों के पास, जिसमें ये जीते हैं और अपनी अनूठी अनुभूतियों से हमें परिचित कराते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…

  • 11th Oct 2020

    Justice the Princess!

    We are living in the greatest democracy in the world, though we might be having some great minds who never find anything positive with our Country. Yes, there are some discrepancies associated with any system or arrangement. One big thing which all modern societies claim is that all are equal before law. Yes, very true,…

  • 10th Oct 2020

    ये बिल्ली जाने कब से मेरा रस्ता काट जाती है!

    ज़नाब बेकल उत्साही जी भी किसी समय कवि-सम्मेलनों की शान हुआ कराते थे| आजकल तो लगता है कि उस तरह के कवि-सम्मेलन ही नहीं होते, वैसे भी मैं काफी समय पहले हिन्दी भाषी इलाका छोड़कर गोवा में आ गया हूँ, अब यहाँ कवि सम्मेलन की उम्मीद, वो भी इस कोरोना काल में! खैर पुराना समय…

  • 9th Oct 2020

    शाश्वतता की कगार – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 8th Oct 2020

    चिड़ियों को दाने, बच्चों को, गुड़धानी दे मौला!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग – इंटरनेट पर ज्ञान देने वाले तो भरे पड़े हैं, पर मैं अज्ञान का ही पक्षधर हूँ। जो व्यक्ति आज भी दिमाग के स्थान पर दिल पर अधिकतम भरोसा करते हैं, उनमें कवि-शायर काफी बड़ी संख्या में आते हैं। वहाँ भी सभी ऐसे हों, ऐसा नहीं…

  • 7th Oct 2020

    आँखों से आँसू की बिछुड़न, होंठों से बाँसुरियों की!

    मेरे लिए गुरु तुल्य – डॉक्टर कुंवर बेचैन जी का एक गीत और आज शेयर कर रहा हूँ| कविता, गीत, ग़ज़ल आदि की यात्रा तो निरंतर चलती रहती है। डॉक्टर बेचैन एक सृजनशील रचनाकार हैं और कवि सम्मेलनों में खूब डूबकर अपने गीत पढ़ते हैं| कुछ गीत जो बहुत शुरू में उनका सुने थे, आज…

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