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73. संगीत की देवी स्वर-सजनी!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट – ज़िंदगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है, ज़ुल्फ-ओ-रुखसार की जन्नत नहीं कुछ और भी है, भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में इश्क़ ही एक हक़ीकत नहीं, कुछ और भी है। तुम अगर नाज़ उठाओ तो, ये हक़ है तुमको मैंने…
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72. सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग – इंटरनेट पर ज्ञान देने वाले तो भरे पड़े हैं, पर मैं अज्ञान का ही पक्षधर हूँ। जो व्यक्ति आज भी दिमाग के स्थान पर दिल पर अधिकतम भरोसा करते हैं, उनमें कवि-शायर काफी बड़ी संख्या में आते हैं। वहाँ भी सभी ऐसे हों, ऐसा नहीं…
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209. हाफ़िज खुदा तुम्हारा!
कल मैंने एक पुराना गीत शेयर किया था, जिसे मेरे एक पुराने मित्र और सहकर्मी गाया करते थे। आज फिर से एक पुराना गीत शेयर कर रहा हूँ, इसे भी मेरे वही मित्र गाते थे। इस गीत को शेयर करते समय एक बात याद आ रही है, बच्चों में संगीत के टेलेंट को लेकर जो…
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208. ज़िंदगी देने वाले सुन!
आज एक पुराना गीत याद आ रहा है, जिसे मुझे मेरे एक पुराने मित्र और सहकर्मी- श्री चुन्नी लाल जी गाया करते थे। ये गीत बहुत पुरानी फिल्म- दिल-ए-नादां का है, जिसे शकील बदायुनी जी ने लिखा है और गुलाम मुहम्मद जी के संगीत निर्देशन में तलत महमूद जी ने गाया है। कुल मिलाकर फिल्मी…
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71. इतना तो मेरे यार करो मैं नशे में हूँ!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग – जगजीत सिंह जी की गाई, शायर शाहिद कबीर की इस गज़ल के बहाने आज बात शुरू करेंगे- ठुकराओ अब कि प्यार करो, मैं नशे में हूँ जो चाहो मेरे यार करो, मैं नशे में हूँ। गिरने दो तुम मुझे, मेरा सागर संभाल लो, इतना तो…
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70. अस्पताल की टूटी टांग!
आज स्वास्थ्य और इस बहाने स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में बात करेंगे। वैसे तो मुझे लगता है कि आज की तारीख में हिंदुस्तान में, और शायद दुनिया में, कोई बीमारी होनी ही नहीं चाहिए। अब लोग ‘फॉलो’ न करें तो अलग बात है वरना सोशल मीडिया पर, दुनिया में जितनी भी तक़लीफें या बीमारियां हैं,…
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69. अब जागना होगा हमें कब तक बता आवारगी!
फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग – आज एक बार फिर से लौटकर आवारगी पर आता हूँ, आवारगी की बात मैंने एक ब्लॉग में की और कहा कि आगे भी इस विषय में बात करूंगा, मुझे लगता कुछ और नामों को आवारगी के दायरे में डाल सकते हैं, जिनमें से एक शब्द ‘फकीरी’…
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207. राहत ना कहो उसको!
वर्ष 1971 में एक फिल्म आई थी- अनुभव, मुख्य भूमिकाओं में थे- संजीव कुमार जी और तनूजा जी। निर्माता, निर्देशक- बासु भट्टाचार्य जी की यह फिल्म उनके कुशल निर्देशन, इसमें शामिल कलाकारों के शानदार अभिनय के लिए काफी प्रसिद्ध हुई थी। इस फिल्म के लिए मन्ना डे जी द्वारा, संगीतकार कनु रॉय की धुन पर…
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68. पहुंचा कौन शिखर पर!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग – एक विषय जिसके संबंध में बात करने का बहुत बार मन होता है, वह है टेलेंट की खोज से संबंधित प्रतियोगिताएं। अब वह गीत-संगीत हो, या नृत्य आदि हों सभी क्षेत्रों मे प्रतिभाओं की खोज के लिए प्रतियोगिताएं होती हैं। शुरू में इन प्रतियोगिताओं को…
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206. मैं वो परवाना हूँ, पत्थर को मोम कर दूं!
Three Day Quote Challenge – Day 3 प्रेम विस्तार है, स्वार्थ संकुचन है, इसलिए प्रेम जीवन का सिद्धांत है। वह जो प्रेम करता है जीता है, वह जो स्वार्थी है मर रहा है। इसलिए प्रेम के लिए प्रेम करो, क्योंकि जीने का यही एक मात्र सिद्धांत है, वैसे ही जैसे कि तुम जीने के लिए…