Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 19th Nov 2018

    This too will pass!

    I remember an inspirational story which I read long back. Somebody was given 2 packets, with something in each and was instructed to open first at a time, when he needed help in life and the second one, again when he feels that he needs help and guidance. After some time that person faced very…

  • 18th Nov 2018

    18. ज़िंदगी के हाथों में, कौन सा निवाला है!

    चलिए पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं। एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- दिल्ली से जाल समेटने से पहले, कुछ और बातें कर लें। वैसे तो रोज़गार की मज़बूरियां हैं वरना कौन दिल्ली की गलियां छोड़कर जाता है। वैसे भी यह तो अतीत की बात है, मैं इसे कैसे बदल सकता हूँ?…

  • 17th Nov 2018

    WOW : A Short trip under the Sea!

    Knock, knock- dreams keep knocking but we are not so open, not so ready to accept them as reality, even for some time. Such is the seriousness overshadowing of our life, life situations and more than that our unwillingness to live our dreams! Anyway I am just going to work on a prompt, which in…

  • 16th Nov 2018

    वो तेरे प्यार का ग़म !

    आज फिर से अनुवाद करने के बहाने मुकेश जी का गाया एक गीत याद कर रहा हूँ, यह गीत उन्होंने 1970 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘माई लव’ के लिए गाया है, संगीतकार हैं- दान सिंह जी और इसके गीतकार हैं- आनंद बक्षी जी। यह गीत सुनकर ही महसूस किया जा सकता है कि मुकेश जी…

  • 15th Nov 2018

    154. रोशनी हो न सकी, दिल भी जलाया मैंने!

    लीजिए प्रस्तुत है एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट। आज मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है, यह गीत उन्होंने फिल्म- ‘दिल भी तेरा, हम भी तेरे’ में धर्मेंद्र जी के लिए गाया है, संगीतकार हैं- कल्याणजी आनंदजी, जो उन संगीतकारों में से एक हैं, जिन्होंने मुकेश जी की अनूठी आवाज़ का भरपूर…

  • 14th Nov 2018

    अरे ओ चमकते सितारे!

    आज भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- अरे ओ तारे (तुम, जो कि सबसे ज्यादा चमक रहे हो), हम तुम्हारी बुलंदी को अधिकार देते हैं बादल द्वारा पैदा की…

  • 13th Nov 2018

    17. लेखनी मिली थी गीतव्रता!

    फिलहाल वही काम कर रहा हूँ, जो सबसे आसान है, अपने पुराने ब्लॉग दोहराना, लीजिए प्रस्तुत है एक और ब्लॉग। आज पहले एक गोष्ठी की बात कर लेते हैं, जो दिल्ली में हिंदी साहित्य सम्मेलन कार्यालय में हुई थी। हिंदी साहित्य सम्मेलन का यह कार्यालय उस समय था, कनॉट प्लेस में उस जगह, जहाँ अभी…

  • 12th Nov 2018

    मैं हूँ रात से भली भांति परिचित!

    पिछली बार की तरह आज भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- मैं रहा हूँ – रात से भली भांति परिचित। मैं बरसात में निकला हूँ बाहर- और वापस भी…

  • 11th Nov 2018

    बर्फीली शाम और जंगल में पड़ाव!

    पिछले दिनों मैंने लॉर्ड बॉयरन की कुछ कविताओं का भावानुवाद प्रस्तुत करने का प्रयास किया था। कविता में एक खूबसूरती यह भी होती है कि हर कोई उसे अपनी तरह से समझ सकता है। आज मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा…

  • 10th Nov 2018

    16. घर, शहर, दीवार, सन्नाटा!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- जिस प्रकार लगभग सभी के जीवन में भौतिक और आत्मिक स्तर पर घटनाएं होती हैं, जिनको शेयर करना समीचीन होता है। मैं प्रयास करूंगा कि जहाँ तक मेरी क्षमता है, मैं रुचिकर ढंग से इन घटनाओं को आपके सपने रखूं। इस क्रम में अनेक नगर, व्यक्ति…

←Previous Page
1 … 1,328 1,329 1,330 1,331 1,332 … 1,374
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
 

Loading Comments...
 

    • Subscribe Subscribed
      • SamaySakshi
      • Join 1,143 other subscribers.
      • Already have a WordPress.com account? Log in now.
      • SamaySakshi
      • Subscribe Subscribed
      • Sign up
      • Log in
      • Report this content
      • View site in Reader
      • Manage subscriptions
      • Collapse this bar